उपलब्धि- 2
स्पार्क रैंकिंग में हिमालयी राज्यों में उत्तराखंड को तीसरा स्थान
दीनदयाल अंत्योदय योजना राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन में पूर्वोत्तर और हिमाचली राज्यों में उत्कृष्ट क्रियान्वयन पर सिस्टमैटिक प्रोग्रेसिव एनालिटिकल रियल टाइम रैंकिंग (स्पार्क) ने तीसरा स्थान दिया है। इसके तहत आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय ने दो करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि भी जारी की है। इस योजना के तहत शहरी क्षेत्रों में गरीब परिवारों और महिलाओं का सामाजिक व आर्थिक क्षमता विकास करते हुए प्रशिक्षण एवं वित्तीय सहायता के माध्यम से रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर प्रदान किए गए। शहरी निराश्रितों को सुसज्जित एवं आवश्यक सेवाओं से युक्त आश्रय उपलब्ध कराया गया है। शहरी पथ विक्रेताओं को आजीविका के लिए उपयुक्त स्थान, संस्थागत ऋण, सामाजिक सुरक्षा और कौशल उपलब्ध कराया गया है। योजना में अब तक 2399 महिला स्वयं सहायता समूहों का गठन करते हुए 20215 महिलाओं का सामाजिक एवं आर्थिक क्षमता में विकास किया गया। 1500 शहरी गरीब महिलाओं को एसएचजी बैंक लिंकेज माध्यम से स्वरोजगार के लिए 3.81 करोड़ का लोन उपलब्ध कराया गया। शहरी विकास निदेशक ललित मोहन रयाल ने बताया कि शहरी क्षेत्र में फेरी कारोबारियों का सभी निकायों में सर्वे पूरा कर 19881 को पहचान पत्र उपलब्ध कराया गया। प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि योजना के तहत कोविड काल में रोजगार में सहायता के लिए फेरी कारोबारियों को नो प्रतिशत ब्याज सब्सिडी पर 11.77 करोड़ का लोन दिया गया। 17 हजार फेरी कारोबारियों को कोविड काल में राज्य सरकार ने प्रति व्यवसायी 10 हजार रुपये की धनराशि दी। सभी निकायों में तीसरे पक्ष की ओर से खुले में रहने वाले बेघरों का सर्वे पूरा करते हुए 14 शहरी आश्रयों का निर्माण 7.88 करोड़ से किया गया। 20939 शहरी गरीब लाभार्थियों के कौशल विकास के लिए निशुल्क प्रशिक्षण दिया गया। 7883 को रोजगार या स्वरोजगार से जोड़ा गया।