इस गतिरोध के चलते संस्थान ने छात्रों की मांग पर विचार करते हुए अन्यत्र अस्थायी कैंपस के लिए जगह की तलाश की है। पिछले दिनों संस्थान की ओर से गठित कमेटी ने ऋषिकेश में एक शिक्षण संस्थान को इसके लिए चिह्नित किया है।
संस्थान ने इसकी पुष्टि कर दी है। एनआईटी के सहायक कुलसचिव/जनसंपर्क अधिकारी जयदीप सिंह ने बताया कि वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर ऋषिकेश में जगह तलाश ली गई है। उन्होंने बताया कि एक उक्त परिसंपत्ति एक शिक्षण संस्थान की है, लेकिन उन्होंने संस्थान का नाम बताने से इनकार कर दिया।
एनआईटी शिफ्टिंग आंदोलन में एनआईटी प्रशासन पर भी उंगली उठ रही है। कहा जा रहा है कि एनआईटी जैसे शिक्षण संस्थान में छात्रों का विरोध में उतरना और कक्षाओं में न जाने के पीछे कुछ अधिकारियों का हाथ है। यदि ऐसा नहीं होता, तो आज तक संस्थान छात्रों के विरुद्ध कुछ न कुछ कार्रवाई करता। इतने छात्रों के एक साथ संस्थान छोड़ देने के बाद भी एनआईटी प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की है।
-एनआईटी प्रशासन शुरू से शिफ्टिंग की बात छिपाता रहा है, जबकि अंदरखाने कुछ और पक रहा था। किसी भी कीमत पर अस्थायी कैंपस को शिफ्ट नहीं होने दिया जाएगा।
-सुरजीत बिष्ट, मीडिया प्रभारी, प्रगतिशील जनमंच, श्रीनगर
-शिफ्टिंग के नाम पर जानबूझकर विवाद करने की साजिश की जा रही है, ताकि लोगों को आपस में लड़ाया जा सके। शिफ्टिंग के लिए छात्रों को ढाल बनाया गया है।
-डा. नवीन नौटियाल, आप नेता, श्रीनगर
-शिफ्टिंग के विरोध में कांग्रेस सड़क पर उतरेगी। यह पार्टी विशेष का मुद्दा नहीं है। शहर की अस्मिता के लिए जो होगा, किया जाएगा। एनआईटी जैसे संस्थान को बचाने के लिए सभी को आगे आना होगा।
-भूपेंद्र पुंडीर, अध्यक्ष नगर कांग्रेस कमेटी, श्रीनगर
प्रदेश के मुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री लगातार आश्वस्त कर रहे हैं कि एनआईटी पहाड़ में ही रहेगी। स्थायी कैंपस का निर्माण पहाड़ में होगा। अस्थायी रुप से भी कक्षाएं यहीं चलनी चाहिए।
-अनूप बहुगुणा, नगर महामंत्री भाजपा, श्रीनगर