ऋषिकेश एम्स में उनका उपचार चल रहा है। छात्राओं के गंभीर रूप से घायल होने पर एनआईटी के छात्र आंदोलित हो गए थे। छात्रों का कहना था कि सुरक्षा की दृष्टि से कैंपस सही नहीं है। एनआईटी के छात्र एक बार पूर्व में भी स्थाई परिसर निर्माण की मांग के लिए आंदोलन कर चुके हैं।
इस बार छात्र कैंपस शिफ्टिंग की मांग कर रहे हैं। बीती मंगलवार को संस्थान के 900 छात्रों ने कैंपस छोड़ दिया। अब एनआईटी प्रशासन छात्रों को मनाने में जुटा है। संस्थान के प्रभारी निदेशक प्रो. आरबी पटेल ने बताया कि छात्रों व उनके परिजनों से लगातार संपर्क किया जा रहा है। छात्रों व परिजनों को मेल व फोन के माध्यम से लौटने का आग्रह किया गया है। आग्रह के बाद भी यदि छात्र नहीं लौटे तो नोटिस दिया जाएगा।
एनआईटी के छात्रों की ओर से कैंपस शिफ्टिंग की मांग किए जाने व कैंपस छोड़ कर जाने से स्थानीय लोग खफा हैं। लंबे समय से एनआईटी के स्थायी परिसर निर्माण के लिए आंदोलन करने वाले प्रगतिशील जनमंच के अध्यक्ष अनिल स्वामी ने कहा कि छात्र सुविधाओं की बात करें, जो जायज है, लेकिन कैंपस शिफ्ट करना पहाड़ विरोधी मांग है और इसका विरोध किया जाएगा।
शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भूपेंद्र पुंडीर ने कहा कि छात्रों के आंदोलन के लिए प्रदेश सरकार के साथ-साथ एनआईटी प्रशासन जिम्मेदार है। सूबे की सरकार ने अपनी प्राथमिकताओं में एनआईटी कैंपस को नहीं लिया। भाकपा नेता इंद्रैश मैखूरी ने कहा कि एनआईटी के छात्रों के आंदोलन के पीछे एक छुपा हुआ एजेंडा काम कर रहा है, जिसके तहत छात्र कैंपस शिफ्ट करने मांग कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री की मानव संसाधन विकास मंत्री से वार्ता हुई है। एनआईटी के स्थायी कैंपस का शीघ्र निर्माण शुरू हो जाएगा। पूर्व विधायक यह बताएं कि उनकी सरकार ने पांच साल में क्या किया। उनको एनआईटी के बारे में जानकारी नहीं है, इसलिए लोगों को बेवकूफ न बनाएं।
- डा. धन सिंह रावत, उच्च शिक्षा राज्य मंत्री व श्रीनगर विधायक