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सेना में अफसर बनने की राह पर उत्तराखंड के ‘नवरत्न’

Sat, 03 Dec 2016 12:11 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
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एसीसी ग्रेडुएशन सेरेमनी में उत्तराखंड के लाल - फोटो : AmarUjala
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गोल्ड मेडलिस्ट नीरज समेत उत्तराखंड के नौ लाल फौज में अफसर बनने की राह पर हैं। सैनिक के तौर पर शामिल हुए इन होनहारों ने पहले सेना को समझा और अब वक्त गुजरने के साथ वह नेतृत्व को तैयार हो रहे हैं। सामान्य पृष्ठभूमि और प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों से निकलकर सेना में अफसर बनने तक का सफर तय करने वाले यह होनहार युवाओं के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं हैं।
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लोहाघाट निवासी दीवान बिष्ट के पिता स्व. श्याम सिंह फौज में थे। वर्ष 1991 में वह सियाचिन में शहीद हो गए। पिता की शहादत ने दीवान के मन में देश और सेना के प्रति जुनून पैदा किया। केवि सागर (एमपी) से शिक्षा हासिल करने के बाद 2007 में उन्होंने बतौर सैनिक महार रेजीमेंट ज्वाइन की। 2013 में उन्होंने कमीशन हासिल किया।

मूलत: टिहरी गढ़वाल निवासी और पिछले कई सालों से सेलाकुई में रह रहे रोहित धनाई के पिता स्व. सुनील धनाई सरकारी स्कूल में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी थे। पिता की मौत के बाद रोहित ने हिम्मत नहीं हारी और 2005 में 14 गढ़वाल राइफल में भर्ती हुआ। जीआईसी सेलाकुई और आशाराम वैदिक इंटर कॉलेज विकासनगर से पढ़ाई करने वाले रोहित को कमीशन के दौरान उनकी शिक्षिका ज्योति ने अंग्रेजी सीखने में खासी मदद की।
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मूलत: जाली, अल्मोड़ा निवासी उमेश चंद्र फुलारा के पिता शंकर दत्त फुलारा बरेली में मेडिकल स्टोर चलाते हैं। उमेश का जन्म और पढ़ाई भी बरेली में ही हुई। 2009 में कोर ऑफ सिग्नल्स में भर्ती उमेश ने जनवरी 2014 में कमीशन हासिल किया। ऊखीमठ, रुद्रप्रयाग निवासी सुमित कुमार के पिता किशन सिंह ऊखीमठ में ज्वैलर हैं। 
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फौजी पिता से कमल को मिली अफसर बनने की प्रेरणा

acc graduation ceremony - फोटो : AmarUjala
ऊखीमठ से ही इंटर तक की शिक्षा ग्रहण करने के बाद 2005 में वह इंडियन नेवी में शामिल हुए। 2014 में कमीशन हासिल करने के बाद फौज में अफसर बनने की तरफ कदम बढ़ाए। रानीखेत (अल्मोड़ा) निवासी कमल सिंह को फौजी पिता ललित सिंह से सेना में शामिल होने की प्रेरणा मिली। आर्मी स्कूल रानीखेत से पढ़ाई के दौरान ही वह फौज में अफसर बनने का सपना देखा करते थे। 2009 में सेना में शामिल होने के बाद उन्होंने 2014 में कमीशन हासिल किया।

सोमेश्वर (अल्मोड़ा) निवासी नरेंद्र के पिता सूबेदार बची सिंह उन्हें हमेशा देश सेवा के लिए प्रेरित करते थे। डीएसबी नैनीताल से पढ़ाई के दौरान नरेंद्र ने पिता की प्रेरणा को जीवन का लक्ष्य बना लिया। 2010 में वह बंगाल इंजीनियरिंग में शामिल हुए, जहां से उन्होंने 2014 में कमीशन प्राप्त किया।

कुसुमखेड़ा, हल्द्वानी निवासी पान सिंह बिष्ट के बेटे हेमंत ने आर्मी स्कूल से पढ़ाई पूरी करने के बाद सेना ज्वाइन की। 2014 में उन्होंने कमीशन हासिल किया। पिथौरागढ़ निवासी विक्रांत धनिक को अपने पिता फौजी मदन सिंह धनिक से फौज में जाने की प्रेरणा मिली।

आर्मी स्कूल पिथौरागढ़ से पढ़ाई करने के बाद 2008 में वह बंगाल इंजीनियरिंग में शामिल हुए। 2013 में कमीशन प्राप्त करने के बाद वह इस वर्ष आईएमए पहुंचे हैं।
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