देहरादून के 22 नए रूटों पर जल्द विक्रम दौड़ते नजर आ सकते हैं। संभावना है कि जुलाई तक सभी विक्रमों के परमिटों को स्टेज कैरिज में परिवर्तित कर दिया जाएगा।
इसके बाद शहर के ऐसे इलाके जहां अभी यातायात के साधन कम हैं या नहीं हैं, वहां भी विक्रम चलते नजर आएंगे। दरअसल, बीते बुधवार को हुई बैठक में संभागीय परिवहन प्राधिकरण (आरटीए) ने विक्रमों को भी स्टेज कैरिज (6 प्लस वन) की परिभाषा में मान लिया है।
अब अगली बैठक में विक्रमों को स्टेज कैरिज का परमिट मिल जाने की पूरी संभावना है। इस समय शहर में 774 विक्रम विभिन्न रूटों पर दौड़ रहे हैं।
संभावना है कि सभी रूटों पर अब विक्रम दौड़ने लगेंगे। इससे उन इलाकों के लोगों को बहुत राहत मिलेगी जहां पर केवल आने और जाने का साधन महंगे ऑटो और निजी वाहन हैं।
- दिनेश चंद्र पठोई, सचिव, संभागीय परिवहन प्राधिकरण
इन इलाकों को मिलेगी राहत
दून विवि रोड, दुधली, रेसकोर्स, मातावाला रोड, रिंग रोड, बद्रीपुर, चंदरनगर आदि
क्या है स्टे कैरिज परमिट
स्टेज कैरिज परमिट बसों को दिए जाते हैं। इसके तहत बसें जगह-जगह से सवारियों को बैठा व उतार सकती हैं।
क्या है ठेका परमिट
ठेका परमिट ऑटो और टैक्सियों को दिए जाते हैं। इसके तहत ऑटो और टैक्सियां केवल बुकिंग के बाद ही सवारियां बैठा सकती हैं।
ऐसे हुआ रास्ता साफ
सिटी बस संचालकों ने हाईकोर्ट में बीते वर्ष याचिका डाली थी कि देहरादून शहर में विक्रमों का संचालन स्टेज कैरिज के रूप में किया जा रहा है, जबकि विक्रमों के पास ठेका परमिट है। कहा था कि ठेका परमिट में ऑटो की तरह एक स्थान से दूसरे स्थान तक यात्री पूरा विक्रम बुक करा सकता है।
लेकिन यहां पर विक्रम स्टेज कैरिज (सिटी बस) की तरह फुटकर सवारी बैठा रहे हैं। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सभी विक्रमों को अवैध माना और इन्हें दिए गए रूटों से बाहर करने और ठेका परमिट पर चलाने के आदेश दिए थे। इसके बाद शहर के कई इलाके विकसित होने और आरटीओ कार्यालय के पास यातायात साधन उपलब्ध कराने संबंधी ज्ञापनों के आने के चलते आरटीए ने शहर में 22 नए विक्रम के रूटों का गठन किया।
इसके लिए शासन का भी दबाव था। हालांकि, इन रूटों पर विक्रम चलाए नहीं जा सके, क्योंकि इसके लिए विक्रमों के परमिट को स्टेज कैरिज में बदला जाना जरूरी था। इसके बाद नवंबर में हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने संभागीय परिवहन प्राधिकरण को ही पूरे मामले में निर्णय लेने का आदेश दे दिया। इसके बाद बीते बुधवार को हुई बैठक में आरटीए ने विक्रमों को भी स्टेज कैरिज (6 प्लस वन) की परिभाषा में मान लिया।