खनन के खिलाफ मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद के अनशन और जल त्याग को देखते हुए रविवार को सरकार हरकत में आई।
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मुख्य सचिव एन रविशंकर को हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर को खनन मुक्त जिला बनाने पर रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया। इससे पहले सुबह प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने मुख्यमंत्री हरीश रावत से मिलकर स्वामी शिवानंद का अनशन तुड़वाने केलिए पहल करने का आग्रह किया। किशोर ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री से यह भी कहा है कि खनन को बिल्कुल ही बंद करवा दिया जाए।
रविवार को मुख्यमंत्री हरीश रावत एक समारोह में शामिल होने हरिद्वार पहुंचे। वहां भी स्वामी शिवानंद के अनशन का मसला उठा तो मुख्यमंत्री ने कहा कि हरिद्वार और उधमसिंहनगर को खनन मुक्त करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई है। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव एन रविशंकर को तीन बिंदुओं पर रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहा है।
मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार सुरेंद्र अग्रवाल ने बताया कि मुख्य सचिव मंत्रिमंडल के समक्ष अपनी रिपोर्ट रखेंगे। मंत्रिमंडल ही दोनों जिलों में खनन के मसले पर फैसला लेगा। मुख्यमंत्री ने देहरादून में आयोजित एक समारोह में भी कमेटी के गठन का जिक्र किया और कहा कि वैध और अवैध खनन में फर्क किया जाना चाहिए। खनन के मुद्दे पर रविवार को सरकार पूरी तरह दबाव में दिखी। मुख्यमंत्री ने अपने लगभग सभी कार्यक्रमों में खनन का जिक्र किया।
इन सवालों पर मांगी रिपोर्ट
1. हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर को खनन मुक्त करने पर राज्य की आय पर क्या प्रभाव पड़ेगा और इसकी भरपाई के लिए क्या किया जा सकता है?
2. खनन न होने पर नदियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा। इससे वन और नदियों के किनारे रह रही आबादी पर क्या असर पड़ेगा?
3. खनन न होने से निर्माण सामग्री की उपलब्धता पर क्या प्रभाव पड़ेगा और इससे भवन निर्माण की लागत कितनी बढ़ जाएगी?
शिवानंद ने कमेटी को खारिज किया
स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कमेटी के गठन को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि है कि मुख्य सचिव ने उनके एक भी पत्र का जवाब नहीं दिया। उल्टे उनके आश्रम को लेकर पर्यावरण संबंधी रिपोर्ट मांग ली गई। मुख्य सचिव पर उन्हें बिल्कुल भरोसा नहीं है।
इस कमेटी का कोई औचित्य नहीं है। स्वामी शिवानंद 21 मई से अनशन पर हैं। 22 मई से वह जल भी त्याग चुके हैं। शिवानंद ने खुद को कमरे में बंद कर लिया है। उनके शिष्य स्वामी आत्मबोधानंद भी 16 मई से अनशन कर रहे हैं। रविवार को स्वास्थ्य परीक्षण के लिए मातृसदन गई डॉक्टरों की टीम को भी बैरंग लौटा दिया गया। रात को एडीएम जीवन सिंह नगन्याल शिवानंद को मनाने पहुंचे। लेकिन बात नहीं बनी।
आसान नहीं है यह काम
प्रदेश की नदियों में खनन का मुद्दा खासा विवादित रहा है। अवैध खनन पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने भी सख्त रवैया अपनाया है। अब सरकार भी फिर हरकत में आई है। लेकिन खनन से आपदा प्रबंधन, रोजगार और प्रदेश के राजस्व जैसे मसले जुड़े हुए हैं।
ऐसे में खनन को पूरी तरह बंद करवाना आसान नहीं होगा। प्रदेश सरकार पर खनन से जुड़े कुछ खास लोगों को फायदा पहुंचाने जैसे आरोप भी लगते रहे हैं। इस मामले में हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर चर्चाओं में रहे हैं। खनन को सरकार राजस्व बढ़ाने के विकल्प के रूप में देखती रही है।
पहले प्रदेश में खनन का काम गढ़वाल और कुमाऊं मंडल विकास निगमों के पास था। इन निगमों से यह कहकर यह काम छीना गया कि खनन की राजस्व क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है। निगम कुल मिलाकर आठ सौ करोड़ रुपये ही कमा पा रहे हैं। इसी तरह संरक्षित क्षेत्र की नदियों में खनन का काम वन विकास निगम के पास है और निगम भी इस काम को दबका में किसी और एजेंसी से करवाने के कारण कारण विवाद में आ गया था।
खनन से जुड़ा दूसरा मुद्दा आपदा प्रबंधन का है। राज्य सरकार लगातार इस बात की दुहाई देती रही है कि नदियों से मलबा नहीं हटाया जाएगा तो यह नदी किनारे बसी बस्तियों के लिए खतरनाक साबित होगा। विश्व बैंक के सहयोग से तैयार किए गए डिजास्टर रिकवरी प्लान में नदियों के तल से मलबा हटाने पर भी जोर है। अभी यह भी स्पष्ट नही है कि खनन के कारोबार से प्रदेश में कितने लोग और किस तरह से जुड़े हुए हैं।
स्वामी शिवानंद एक बार सरकार को मौका भी तो दें। सरकार को पहले चेतावनी देते और फिर अन्न-जल त्यागते। पहले निगमानंद जब धरने पर बैठे थे तो उनसे मिलने गया था। आज जब मै मुख्यमंत्री से मिला तो उन्होंने आश्वासन दिया कि वे इस मामले को सुलझाने की कोशिश करेंगे।
- किशोर उपाध्याय, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष