छुट्टी नहीं मिलने के कारण सैनिकों की जिन शिक्षक पत्नियों को करवाचौथ पर पति के साक्षात दर्शन नहीं हो पाते हैं, उनके लिए शिक्षा विभाग ने करवाचौथ पर ही तोहफा दिया है।
अब ऐसी शिक्षक पत्नियां मनमाफिक पोस्टिंग पा सकेंगी। शिक्षा विभाग की इस पहल से प्रदेश में करीब 500 सैनिकों की शिक्षक पत्नियों लाभ मिलेगा।
सैनिक बाहुल्य प्रदेश में उन शिक्षिकाओं को बड़ी राहत मिलने जा रही है, जिनके पति सेना में कार्यरत हैं। वर्षों से दुर्गम और अति दुर्गम में तैनात होने के बावजूद इनका तबादला नहीं हो रहा है। प्राथमिक से लेकर इंटर कॉलेज तक की ऐसी शिक्षिकाओं को अनुरोध के आधार पर, जहां वह चाहेंगी, तबादला दिया जाएगा।
हालांकि, इसके लिए दुर्गम में कम से कम पांच साल की सेवा अनिवार्य की गई है। शिक्षा विभाग ने शिक्षकों के तबादला नियमावली ड्राफ्ट में संशोधन कर मंजूरी के लिए शासन को भेज दिया है।
500 शिक्षिकाओं को लाभ
कैबिनेट की अगली मीटिंग में इसे मंजूरी मिलने की पूरी उम्मीद है। प्रदेश में ऐसी शिक्षिकाओं की संख्या लगभग 500 बताई गई है। हालांकि इसके लिए अभी कोई सर्वे नहीं हुआ है।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि कैबिनेट से प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद इनकी वास्तविक संख्या का पता चल सकेगा। बता दें कि प्रदेश के करीब एक लाख लोग सेना में तैनात हैं।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रितों को भी लाभ
सैनिक की पत्नी शिक्षिकाओं के अलावा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रितों का भी अनुरोध के आधार पर तबादला हो सकेगा। इसके लिए कैबिनेट में प्रस्ताव लाया जा रहा है। हालांकि, प्रदेश में अब गिने चुने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी हैं।
नहीं चलेगी पहुंच
कोई शिक्षक फर्जी मेडिकल और पहुंच के आधार पर तबादला नहीं पा सके, इसके लिए भी संशोधन किए गए हैं। हालांकि, कुछ विभागीय अधिकारियों का कहना है कि संशोधन से फर्जीवाड़ा कुछ हद तक कम होगा, लेकिन पूरी तरह से रुक पाना संभव नहीं है। उनका कहना है कि सिफारिशी तबादलों को रोका जाना आसान नहीं हैं।
फौजी बड़ी परेशानी में हैं। वे सीमा पर तैनात हैं और उनकी पत्नियां एवं परिवार कहीं और हैं। यही हाल स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के आश्रितों का है। हाल यह है कि उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है। उनकी देखभाल हो सके इसके लिए उनका अनुरोध के आधार पर तबादले का प्रस्ताव लाया जा रहा है। प्रदेश में फौजियों की पत्नी शिक्षिकाओं की संख्या लगभग एक फीसदी होगी।
-मंत्री प्रसाद नैथानी, शिक्षा मंत्री
जहां जरूरत, वहीं भेजे जाएंगे नए शिक्षक
प्रदेश के कई स्कूलों में छात्र और शिक्षकों की संख्या का अनुपात गड़बड़ है। कहीं शिक्षक नहीं हैं तो कहीं छात्र नहीं होने के बावजूद बड़ी संख्या में शिक्षक तैनात कर दिए गए हैं। हाल ही में नौकरी पाने वाले 2,794 शिक्षकों की तैनाती में ऐसी गड़बड़ी से बचने के लिए छात्र संख्या के आधार पर नियुक्ति देने का निर्देश दिया गया है। शिक्षा महानिदेशक ने कहा है कि नए शिक्षक वहीं भेजे जाएं, जहां शिक्षकों की जरूरत है।
नए 2,794 शिक्षकों की दुर्गम और अति दुर्गम स्कूलों में नियुक्ति की गई है। नियुक्ति के लिए सभी जिलों में 26 पर्यवेक्षकों की तैनाती की गई थी। ऊधमसिंहनगर की पर्यवेक्षक वरिष्ठ प्रवक्ता डायट देहरादून हेमवंती बोरा के मुताबिक ऊधमसिंहनगर में 28 अभ्यर्थियों को छोड़कर बाकी सबको नियुक्ति दी जा चुकी है।
बचे अभ्यर्थियों के पास एनओसी या असली प्रमाणपत्र नहीं थे। बताया कि रिपोर्ट विभाग को सौंप दी गई है। उधर, कुछ अन्य जिलों में भी शिक्षकों की सीटें खाली रह गई है। ये वे अभ्यर्थी हैं जो बगैर विभाग की एनओसी के मनचाहे जिले में आने के लिए फिर से शिक्षक के पद पर नियुक्ति पाना चाहते हैं।