भाजपा के दिग्गज नेता की आंख का तारा रही एक मैडम आजकल अपनी तैनाती के लिए कांग्रेस से नजदीकी बढ़ा रही हैं। भाजपा के बूते मैडम एक विभाग की अध्यक्ष तक बन गई, जबकि शासन से पद स्वीकृत नहीं था।
मैडम जब कुर्सी पर बैठी तो उनके पति भी साहब बन गए। अब ढलती उम्र के चलते रिटायरमेंट नजदीक आया तो उन्होंने अपनी एडजेस्टमेंट के लिए पुराना रसूख दांव पर लगाया है। सरकार बेशक बदल गई, लेकिन शासन में बाबू तो पुरानी जान पहचान वाले ही हैं।
मैडम को जानने वाले एक बड़े बाबू ने इस बार उनके लिए एक नया पद सृजित कर डाला। जिस विभाग में मनमाने तरीके से मैडम अध्यक्ष बन बैठी थी अब उसका सलाहाकार बनाये जाने की तैयारी चल पड़ी है। रिटायरमेंट के बाद भी मैडम के गाड़ी और बंगले का प्रबंध लगभग हो ही गया था कि ऐन मौके पर खेल बिगड़ गया।
विभाग के मंत्री ने मैडम की तैनाती से इंकार कर दिया। मंत्री ने बड़े बाबू को साफ किया कि मैडम को इस पद पर नहीं रख सकते हैं। तो बड़े बाबू ने अपने एक छोटे बाबू को कहकर एक केंद्रीय योजना के तहत दूसरा पद सृजित करवाया। छोटे बाबू ने फिर प्रस्ताव मंत्री तक पहुंचाया।
दोबारा प्रस्ताव देखकर मंत्री का माथा ठनका तो उन्होंने बड़े बाबू को बुलवाया और जमकर सुनाया। अब सुनने में आया है कि साठ पार कर चुकी इस मैडम ने मंत्री का भी तोड़ निकाला है उसने एक दूसरे बड़े बाबू के हाथों मुख्यमंत्री को अपनी तैनाती का प्रस्ताव भिजवाया है। अब देखना है कि मुख्यमंत्री मैडम की फाइल पर अपना अनुमोदन कब देते हैं।