बड़ी परियोजनाओं को पीपीपी मोड पर दिए जाने का प्रस्ताव
प्रदेश में केंद्रीय सड़क परियोजनाओं को छोड़कर राज्य की जितनी परियोजनाएं होती हैं, उसके सापेक्ष वन भूमि कानून के तहत दोगुनी भूमि पौधरोपण के लिए देनी होती है। जबकि राज्य में इसके लिए सीमित भूमि बची है। लोनिवि ने इसके लिए नई नीति बनाने और इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए प्रस्ताव दिया है। बड़ी परियोजनाओं को पीपीपी मोड पर दिए जाने का प्रस्ताव भी दिया गया है। इसके अलावा भूमि मुआवजा की स्वीकृति, वितरण और काश्तकारों की सहमति लेने में लगने वाले अतिरिक्त समय को कम करने के लिए भी स्थायी रास्ता निकाला जाएगा।
सड़क परियोजनाओं में सामने आने वाली प्रमुख चुनौतियां
1. वनभूमि हस्तांतरण की जटिल प्रक्रिया के कारण कई प्रस्ताव लंबित
2. भूमि मुआवजा की स्वीकृति, वितरण और काश्तकारों की सहमति लेने में लगने वाला अतिरिक्त समय
3. कार्यानुकूल सीमित मौसम उपलब्ध होना, श्रमिकों की कमी
4. मानसून में भूस्खलन एवं बादल फटने से कार्य प्रभावित
5. पर्याप्त मानव संसाधन की कमी
6. कौशल विकास के लिए मानव और तकनीकी संसाधनों की आभाव
नए पदों का सृजन, पुराने कुछ पद होंगे समाप्त
लोनिवि में कौशल विकास और तकनीकी क्षमता को बढ़ाने के लिए आने वाले दिनों कई महत्वपूर्ण बदलाव किए जा सकते हैं। इसके तहत कुछ नए पदों का सजृन किया जा सकता है, जबकि कुछ ऐसे पदों का समाप्त किया जा सकता है, जिनकी अब कोई उपयोगिता नहीं रह गई है।
अभिनव प्रयोग पर मिलेगा विशेष भत्ता, प्रशिक्षण सेल होगी गठित
लोनिवि में उत्कृष्ट एवं अभिनव प्रयोग करने वालों अधिकारियों, कर्मचारियों को विशेष प्रोत्साहन भत्ता दिए जाने का भी प्रस्ताव है। इसके अलावा नवीनतम तकनीकी प्रयोग एवं विभागीय कार्यों को कुशलता के साथ किए जाने के लिए विभाग में प्रशिक्षण सेल गठित किए जाने का भी प्रस्ताव है।
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उत्तराखंड @ 25 के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए विभाग की ओर से कई प्रस्ताव मुख्यमंत्री के सम्मुख प्रस्तुत किए गए हैं। इनमें वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया को आसान बनाए जाने के लिए नई नीति लाने का प्रस्ताव प्रमुख है। मुख्यमंत्री की ओर से इस पर सहमति जताई गई है। शीघ्र ही इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। - डॉ. पंकज कुमार पांडेय, सचिव, लोनिवि