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देश सेवा में शामिल हुए SSB के 78 नव आरक्षी

Wed, 17 Jun 2015 06:34 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, श्रीनगर
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कदम-कदम बढ़ाए जा, खुशी के गीत गाए जा। ये जिंदगी है कौम की, कौम पर लुटाए जा...।
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सीना चौड़ा करने वाली इस गर्वीली धुन के साथ सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के 78 नव आरक्षी दीक्षांत समारोह के बाद सरहद की रक्षा के लिए निकल गए। इससे पहले एसएसबी अकादमी के निदेशक आईजी एस बंदोपाध्याय ने पासिंग आउट परेड (पीओपी) की सलामी ली।

बुधवार को अकादमी के फुटबॉल ग्राउंड में सुबह दीक्षांत परेड का समारोह का आयोजन हुआ। कमांडेट (प्रशिक्षण) संजय कुमार ने नव आरक्षियों को राष्ट्र सुरक्षा की शपथ दिलाई। अकादमी निदेशक बंदोपाध्याय और कमांडेंट ने परेड का निरीक्षण किया। मुख्य अतिथि बंदोपाध्याय ने कहा कि एसएसबी का हिस्सा बनना गौरवशाली क्षण है।
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उन्होंने बताया कि एसएसबी की वाहनियों को नक्सल प्रभावित क्षेत्र छत्तीसगढ़ व झारखंड तथा आतंकी प्रभावित क्षेत्रों असम और जम्मू-कश्मीर में आंतरिक सुरक्षा के लिए नियुक्त किया गया है। इन भटके हुए नागरिकों को राष्ट्र की मुख्य धारा में लाना चुनौतीपूर्ण कार्य है।

कमांडेंट संजय कुमार ने कहा कि नव आरक्षियों ने अकादमी में 44 सप्ताह तक कठिन प्रशिक्षण प्राप्त किया है। इस दौरान उन्हे साहसिक प्रशिक्षण, हथियार चलाने का प्रशिक्षण, मैप रीडिंग, कंप्यूटर प्रशिक्षण, जंगल एक्सरसाइज और रॉक क्लाइबिंग का प्रशिक्षण दिया गया।

कार्यक्रम के अंत में विभिन्न प्रशिक्षण में अव्वल रहे आरक्षियों को पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम का संचालन डा. राकेश भट्ट ने किया।

अभिमन्यु रहे बेस्ट
आरक्षी अभिमन्यु कुमार सिंह ओवर ऑल बेस्ट आरक्षी बने। वह आतंरिक गतिविधियों में भी सर्वोत्तम रहे। शशिभूषण कुमार सिंह वाह्य गतिविधियों में बेहतर रहे। जबकि प्रमोद कुमार सिंह ने निशानेबाजी में श्रेष्ठ स्थान प्रात किया। खेल व शारीरिक गतिविधि में बधिती राजू और ड्रिल व टर्न आउट गतिविधि में कमल कुमार सिंह सर्वश्रेष्ठ रहे।
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उत्तराखंड से एक भी जवान नहीं
78 प्रशिक्षुओं ने 44 सप्ताह तक विभिन्न स्थानों पर कठिन प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसमें बिहार से 59, झारखंड से 10, आंध्र प्रदेश से पांच, तेलंगाना से तीन और उत्तर प्रदेश से एक प्रक्षिशु नव आरक्षी बने। इनमें उत्तराखंड से एक भी आरक्षी नहीं है।
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