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प्राचीन स्मारकों के पास रहने वालों को बड़ी राहत

Sun, 05 Jul 2015 01:27 PM IST
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
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भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के संरक्षित स्मारकों के नजदीक रहने वाले लोगों के लिए राहत भरी खबर है।
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एएसआई स्मारकों के नजदीक भवन निर्माण के प्रतिबंध का दायरा कम करने जा रहा है। इसके लिए स्मारकों की तीन श्रेणियां बनाई गई हैं। देश के अलग-अलग प्रांतों से इन श्रेणियों के मानक के लिहाज से सूची बनवाई जा रही है। इस नई व्यवस्था से सबसे अधिक राहत तीसरी श्रेणी के स्मारकों के करीब रहने वालों को मिलेगी।

उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश आदि प्रांतों में प्रतिबंध के दायरे में पूरे गांव आ जाते हैं जिससे लोग यहां निर्माण नहीं करवा पा रहे थे। पूरे देश में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पास चार हजार धार्मिक और ऐतिहासिक संरक्षित स्मारक हैं। इनमें 27 विश्व स्तरीय हैं।
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इनमें संरक्षित स्मारकों के सौ मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार निर्माण प्रतिबंधित है। इस दायरे में पहले से निर्मित भवनों की सिर्फ मरम्मत भर हो सकती है। 101 से लेकर 300 मीटर दायरे में राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण की अनुमति के बाद ही कोई निर्माण कराया जा सकता है। प्राधिकरण की अनुमति लेने में लोगों को सालों चक्कर काटने पड़ते हैं।

बहुत-बहुत से छोटे-छोटे स्मारक दूर-दराज गांवों के पुरवों में हैं। इन लघु स्मारकों के चारों तरफ सौ मीटर के दायरे में पूरा पुरवा आ जाता है। केंद्रीय संस्कृति विभाग के निर्णय के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने स्मारकों के वर्गीकरण के लिहाज से सूची तैयार करवानी शुरू कर दी है।
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उच्च पदस्थ विभागीय सूत्रों ने बताया कि विश्व स्तरीय स्मारकों के नजदीक प्रतिबंध का दायरा कम नहीं होगा। दूसरी और तीसरी श्रेणी के स्मारकों का दायरा कम किया जा रहा है। सर्वेक्षण की दून सर्किल ने स्मारकों की सूची प्राधिकरण को उपलब्ध करा दी है। सारे प्रांतों से सूची आने के बाद दूसरी और तीसरी श्रेणी के स्मारकों के नजदीक प्रतिबंध का नया दायरा घोषित किया जाएगा।

श्रेणी ए- विश्व स्तरीय स्मारक जैसे ताजमहल वगैरह
श्रेणी बी- ऐसे स्मारक जिन पर टिकट लगता है या धार्मिक, सांस्कृतिक मान्यता है
श्रेणी सी- कम ऐतिहासिक महत्व वाले छोटे-छोटे स्मारक, स्तूप वगैरह
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