ऐसे में मजबूरन पेट भरने के लिए महंगी दरों पर खाद्यान्न लेकर गुजर बसर करनी पड़ती है। सरकार ने गरीबों की इस समस्या को देखते हुए उसके निस्तारण की पहल शुरू करने की तैयारी की है। इसके तहत प्रदेश में मोबाइल सिम पोर्टबिलिटी की तरह ही राशन कार्ड पोर्टबिलिटी योजना शुरू करने की तैयारी की जा रही है।
इसके शुरू होने के बाद प्रदेश के किसी भी जिले से बना राशन कार्ड दूसरे जिले में मान्य होगा। बस कार्डधारक को स्थानीय स्तर पर कार्ड का ब्योरा आपूर्ति कार्यालय में देकर उसे अपने घर के पास वाली दुकान से कार्ड को जुड़वाना होगा। इसके लिए उसे नया कार्ड बनवाने की आवश्यकता भी नहीं होगी।
उदाहरण के तौर पर पौड़ी या अन्य किसी अन्य जनपद से कोई परिवार देहरादून आकर रहता है तो उसे सस्ते राशन से वंचित नहीं रहना पड़ेगा। नई व्यवस्था के तहत कार्डधारक को देहरादून में उसके निवास के पास स्थित दुकान से जोड़ दिया जाएगा। जहां से उसे आसानी से खाद्यान्न मिल सकेगा।
सस्ती दर पर राशन वितरण के लिए पोर्टबिलिटी राशन कार्ड योजना पर विचार किया जा रहा है। आंध्र प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश में यह योजना सफल रही है। इन राज्यों में योजना को किस तरह से लागू किया गया। इसका अध्ययन कर रहे हैं।
- सुशील कुमार, सचिव, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग
प्रदेश में 23 लाख राशन कार्ड धारकों को प्रत्येक महीने सस्ता राशन दिया जाता है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना और राज्य खाद्य योजना के अंतर्गत कार्ड में प्रति यूनिट के हिसाब से गेहूं, चावल, चीनी मिलती है। इस व्यवस्था का संचालन करने के लिए प्रदेश में 9200 सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों को लाइसेंस दिया गया है।