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उत्तराखंड में वन विभाग की कोशिशें नाकाफी, आग बेकाबू, धधक रहे राज्य भर के जंगल

Sun, 12 May 2019 09:50 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हल्द्वानी
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उत्तराखंड के जंगलों में आग - फोटो : अमर उजाला
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उत्तराखंड में जंगलों की आग थमने का नाम नहीं ले रही है। कुमाऊं के अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़, चंपावत और नैनीताल जिले के सैकड़ों हेक्टेयर में फैले जंगल कई दिन से धधक रहे हैं। इससे पेड़-पौधों को तो नुकसान हो रहा है, साथ ही वन्य जीव भी मर रहे हैं।

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जंगल की बेकाबू हुई आग पर काबू पाने की वन विभाग की तमाम कोशिशें नाकाफी साबित हो रही हैं। वह एक जगह आग बुझाते हैं कि दूसरी जगह आग लगने की सूचना मिल जाती है। शुक्रवार को कुमाऊं में आग लगने की 45 घटनाओं में 90 हेक्टेयर जंगल जल गए। इससे पहले गुरुवार तक कुमाऊं में आग की 264 घटनाओं में 373 हेक्टेयर जंगल जल चुका था।

गढ़वाल रेजीमेंट के सैनिकों को भी मशक्कत करनी पड़ी

शुक्रवार की शाम बागेश्वर वन प्रभाग के कौसानी और द्यांगण, जौलकांडे के जंगलों में आग लग गई। आग लगते ही जंगल धू धूकर जलने लगा और कुछ ही देर में आसमान में धुआं छा गया। वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची आग पर काबू पाया। इधर दशोली के जंगल में भी आग लग गई। वन कर्मियों ने वहां फायर ड्रिल की और फायर लाइन की सफाई की।

अल्मोड़ा के बिनसर, कोसी रेंज के चौंसली वन पंचायत और अल्मोड़ा रेंज के सिराड़ फलसीमा, कपड़खान और नगर में सीएमओ ऑफिस के निकट के जंगलों में आग की घटनाएं हुई हैं। इस दौरान करीब तीन हेक्टेयर से अधिक जंगल जल गया। चौबटिया क्षेत्र के हाईएस्ट प्वांइट और हैलीपैड आदि क्षेत्रों में गुरुवार को अचानक आग धधक उठी। आग पर काबू पाने के लिए 15 गढ़वाल रेजीमेंट के सैनिकों को भी मशक्कत करनी पड़ी।

मल्लिकार्जुन मंदिर परिसर तक पहुंची आग

इधर, पिथौरागढ़ के ओगला और नारायणनगर के चीड़ के जंगलों के साथ ही अस्कोट, चंपावत और टनकपुर के जंगल भी आग से धधक रहे हैं। अस्कोट मल्लिकार्जुन मंदिर परिसर तक पहुंची आग पर तो काबू पा लिया गया, लेकिन सैकड़ों पौधे नष्ट हो गए।

चंपावत में बूम रेंज की फायर टीम ने एक साधू को सड़क किनारे जंगल में आग लगाते गिरफ्तार किया है। पकड़ा गया साधू मोहल्ला ताड़तला, चौराह जौनपुर निवासी स्वामी रामकृष्ण तीर्थ पुत्र स्व. ओमप्रकाश सेठ है। आरोपी के खिलाफ वन अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेजा गया है।

यहां आग की बड़ी घटनाएं सामने आईं

 इधर, हल्द्वानी वन प्रभाग के जौलासाल, रामगढ़ रेंज और सूर्या गांव में आग की बड़ी घटनाएं सामने आईं। जौलासाल और रामगढ़ की आग पर काबू पा लिया गया। सूर्या गांव के जंगल में लगी आग पर वन कर्मी काबू पाने में जुटे थे।

इसके अलावा सीटीआर, रामनगर वन प्रभाग के बाद अब तराई पश्चिमी वन प्रभाग आमपोखरा रेंज के जंगल में लगी आग गांव तक पहुंच गई। दमकल की तीन गाड़ियों ने आग पर काबू पाया। ओखलकांडा के दुनीधूरा, छिनारी, कलियाधूरा और सुरखाल के जंगल भी आग से घिर गए।

गढ़वाल मंडल के जंगल भी आग की चपेट में

उत्तराखंड के गढ़वाल मंडल के जंगल भी आग की चपेट में हैं। कर्णप्रयाग पहाड़ी क्षेत्रों में गर्मी बढ़ते ही जंगल धधकने शुरू हो गए हैं। चार दिनों से चमोली जिले के जंगलों में आग लगने से करीब 10 लाख रुपये की वन संपदा राख हो गई है, वहीं पिछले सात वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो 1.10 करोड़ से अधिक की वन संपदा को नुकसान पहुंचा है। आग से दुर्लभ प्रजाति के जानवर और पक्षियों के जीवन को भी खतरा बना है।
 
चमोली जिले के एंड, डिम्मर, जेकिंडी, कालेश्वर, सिरतोली, बेरफाला, घाघू, मौणा, उमट्टा, मैठाणा, गोपथला, रैंखाल के जंगलों में वन एवं वन्य जीवों को भारी नुकसान पहुंचा है। जंगलों में आग बुझने के बाद चारों तरफ धुएं का गुबार बना है, जो जन स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बना हुआ है। कर्णप्रयाग में उमा देवी मंदिर में आए बुजुर्ग यात्रियों ने बताया कि उनको धुएं में सांस लेने में तकलीफ हो रही है। कालेश्वर के ग्राम प्रधान हरीश चौहान, बलबीर रावत, शैलेश, अरविंद, अनूप आदि ने कहा कि वन विभाग के पास आग बुझाने के पर्याप्त साधन नहीं होने से हर वर्ष भारी वन संपदा आग की भेट चढ़ जाती है। जंगलों में आग लगने से घुरूड़, काकड़ सहित अन्य दुर्लभ प्रजाति के जंगली जानवरों को भी खतरा पैदा हो गया है।
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भिलंगना और बालगंगा रेंज के जंगलों में धधक रही आग

नई टिहरी में गर्मी बढ़ने के साथ ही जंगलों में आग लगने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। भिलंगना, बालगंगा, पौखाल, टिहरी और प्रतापनगर रेंज के जंगल आग से धधक रहे हैं। वन कर्मियों के सामने आग पर नियंत्रण पाना टेढ़ी खीर बनती जा रहा रही है। टिहरी जिले में नरेंद्रनगर, मसूरी, टिहरी डैम वन प्रभाग और टिहरी वन प्रभाग के अंतर्गत इस फायर सीजन में अब तक वनाग्नि की 55 घटनाएं हो चुकी हैं, जिससे 67 हेक्टेयर वन भूमि क्षेत्र में आग लगने से लाखों की वन संपदा को नुकसान पहुंचा है। जंगल में आग लगने से चीड़ के साथ ही बांज, बुरांश, देवदार के पेड़ों को नुकसान पहुंचा है।

विधायक शक्ति लाल शाह ने डीएफओ को बीते दिन जंगल की आग से रौसाल गांव में राजेंद्र सिंह के कच्चे मकान को हुए नुकसान का शीघ्र मुआवजा देने को कहा है। रेंज अधिकारी एसएस नेगी ने बताया कि जब तक वन कर्मी एक जगह जंगल की आग पर काबू पा रहे हैं, तब तक दूसरे क्षेत्र के जंगल में आग लगने की सूचना मिल रही है।
 
हालांकि वनाग्नि पर नियंत्रण पाने के लिए वन विभाग ने अलग-अलग क्षेत्रों में 133 क्रू स्टेशन, 336 फायर वाचर, 815 वन रक्षक, वन दरोगा, दैनिक श्रमिक और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की तैनाती की है। इसके बाद भी वनाग्नि पर नियंत्रण पाने में वन महकमा नाकाम साबित हो रहा है। वन विभाग के मास्टर कंट्रोल रूम प्रभारी आशीष डिमरी का कहना कि वनाग्नि पर नियंत्रण पाने के लिए कर्मचारियों के पास फावडे़, फायर टूल्स किट, हेलमेट, फेस मास्क, दरांती और बेलचा आदि संसाधन दिए गए हैं।
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