नेपाल सरकार ने भारत सरकार से शारदा बैराज की जगह नए पुल निर्माण की मांग की है।
नेपाल अर्थ मंत्रालय के सचिव सुमन प्रसाद शर्मा ने कहा कि नेपाल सरकार ने भारत सरकार से नए पुल निर्माण की मांग की है। उन्होंने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि अब दोनों देशों के बीच मैत्री प्रगाढ़ होने के साथ ही व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंधों में भी सुधार होगा।
उन्होंने सीमा क्षेत्र का अवलोकन करने के अलावा भारतीय कस्टम अधिकारियों से दोनों देशों के बीच व्यापार और आवागमन के बारे में जानकारी ली। उन्होंने शारदा बैराज को दोनों देशों के लिए लाइफ लाइन बताया।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच आवगमन को सुगम बनाने के लिए नेपाल सरकार ने भारत सरकार से नए पुल निर्माण की मांग की है।
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के नेपाल के साथ मैत्री बढ़ाने के प्रयासों से दोनों देशों के बीच व्यापार, पर्यटन, सांस्कृतिक, शिक्षा आदि क्षेत्रों को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने भारतीय कस्टम अधिकारियों से सीमा पर चल रहे व्यापार के बारे में जानकारी ली।
भारतीय कस्टम विभाग की सराहना की
नेपाल अर्थ मंत्रालय के निदेशक सूर्य प्रसाद आचार्य ने भारतीय कस्टम विभाग की सराहना कर अधीक्षक एसके मेहता को नेपाल की ओर से प्रशस्तिपत्र भेंट किया।
इस दौरान नेपाल अर्थ मंत्रालय के सह सचिव कृष्ण प्रसाद देवकोट और दिल्ली प्रसाद सिवाकोटी, उप महानिदेशक राम प्रसाद रेग्मी और रामणी दवाड़ी, आंतरिक राजस्व के मुक्ति राम आचार्य, डीएसपी सशस्त्र नर बहादुर रावत मौजूद थे।
सीमा पर तस्करी और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों पर नियंत्रण को कस्टम और सुरक्षा बलों को अपना कार्य जिम्मेदारी से निभाना चाहिए, किंतु उन्हें आमजन को भरपूर सुविधाएं देने में गुरेज नहीं करना चाहिए।
- सुमन प्रसाद शर्मा, सचिव नेपाल अर्थ मंत्रालय
पिछले दो वर्षों से भारतीय कस्टम सीमा पर मैत्री संबंधों को प्रगाढ़ करने में सहयोग दे रहा है। आम नेपाली नागरिकों को सीमा पर आवागमन में किसी प्रकार की दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ रहा है।
- सूर्य प्रसाद आचार्य, महानिदेशक नेपाल, अर्थ मंत्रालय
सिंचाई नहर के लिए बनाया गया था शारदा बैराज
अंग्रेज हुकमरानों ने वर्ष 1928 में शारदा नदी पर सिंचाई नहर निकालने के लिए बैराज का निर्माण कराया था। वर्ष 1965 में नेपाल के महेंद्रनगर की स्थापना के बाद से शारदा बैराज दोनों देशों के बीच आवागमन में सेतु का कार्य भी कर रहा है।
बनबसा फुटहिल में निर्मित शारदा बैराज से निकली नहर से यूपी के रायबरेली तक करीब 550 किमी. दूर तक 2208000 एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई की जाती है।
लगभग साढ़े नौ करोड़ रुपये की लागत से निर्मित शारदा बैराज को 11 दिसंबर 1928 को तत्कालीन अंग्रेज गवर्नर सर मैलकम हेली ने राष्ट्र को समर्पित किया था। उत्तराखंड की भूमि पर स्थित शारदा बैराज अब भी यूपी के पास है।