नेपाल में 25 अप्रैल को आए 7.8 तीव्रता के भूकंप ने बिहार के मधुबनी जिले में धरती का सीना चीरकर रख दिया था।
वहां तीन किलोमीटर तक धरती में दरारें आ गई थीं। भूकंप के दौरान धरती के भीतर से रेत और बालू निकलने केभी साक्ष्य मिले। इससे धनुष-बाण जैसी संरचना बन गई है। मैक्रो सीस्मिक सर्वे केलिए पहुंची भारतीय भूगर्भ सर्वेक्षण (जीएसआई) की टीमों ने इसे रिपोर्ट किया है।
इन्हीं टीमों ने मधुबनी के बाद सुपौल जिले के बीरपुर क्षेत्र का भी दौरा किया। इस 12 मई को नेपाल में जब एक बार फिर तेज झटके लगे तो यह टीमें उस दौरान वहीं कार्य कर रही थीं। खुद टीम के सदस्यों ने इन झटकों का असर देखा। वाहन हिल रहे थे।
इन झटकों ने मधुबनी की दरारों पर क्या असर डाला, इसे जानने के लिए टीमें फिर मधुबनी लौट गईं। निरीक्षण किया तो सामने आया कि वहां 40 मीटर जोन में 3 से 5 सेंटीमीटर की कई नई दरारें उत्पन्न हो गई हैं। यहां भी दरारों के इर्द-गिर्द रेत और बालू का जमाव मिला।
टीमों के सर्वे का यह पहला चरण है। इसी के साथ माइक्रो सीस्मिक सर्वे भी किए जा रहे हैं। इसके बाद रिपोर्ट कंपाइल होगी। नेपाल में भूकंप की वजह से बिहार में बड़े विनाश के बाद टीमें वहां का जायजा लेने पहुंची थीं। जीएसआई उत्तराखंड यूनिट के निदेशक वीके शर्मा बताते हैं कि ईस्टर्न जोन की टीमों ने दरारें रिपोर्ट की हैं।
भूकंप से धरती का सीना चीर निकली रेत, बालू, मैक्रो सीस्मिक सर्वे के लिए गई जीएसआई की टीमों ने हाल देखा।