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लापरवाही : सिस्टम की सुरक्षा व्यवस्था पर पोत दी कालिख

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चंद लोगों ने कोर्ट के बाहर पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर ही कालिख पोत दी। परिसर के बाहर हुई स्याही फेंकने की घटना के बाद तमाम सवाल सुरक्षा व्यवस्था और खुफिया तंत्र पर भी उठ रहे हैं। यह तो केवल स्याही का मामला था, बंदियों की अदावत में तो इससे भी बड़ा कांड हो सकता था। अब सवाल यह है कि यदि कुछ बड़ी अनहोनी होती तो इसका जिम्मेदार कौन होता? बंदियों की सुरक्षा को लेकर इंतजाम इतने हल्के कि कोई भी सुरक्षा घेरा तोड़कर अंदर आ जाए। कचहरी के बाहर भीड़ जमा थी, लेकिन किसी ने इसका संज्ञान नहीं लिया। घटना के बाद वहां पर आधे शहर की फोर्स को तैनात कर दिया गया।
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दरअसल, हर रोज कचहरी में बड़े-बड़े मुल्जिमों को लाया जाता है। कोई हत्या का मुल्जिम होता है तो कोई गैंगस्टर। किसी की किसी से दुश्मनी है तो कोई अपने बदले की ताक में रहता है। यही कारण है कि बंदियों को कड़ी सुरक्षा में कोर्ट लाया जाता है। कचहरी परिसर के बाहर शनिवार को हुई इस घटना में सबसे पहले एलआईयू की हीलाहवाली की बात उठ रही है। जिस संगठन के लोगों ने स्याही फेंकी वह अक्सर किसी न किसी प्रदर्शन में रोजमर्रा के तौर पर शामिल रहता है। पिछले दिनों बिना अनुमति के जिलाधिकारी ऑफिस पर प्रदर्शन में भी संगठन का नाम आया। बावजूद इसके संगठन के जाने-पहचाने चेहरे बाहर जमा हो रहे थे इसकी भनक तक किसी को नहीं लगी।



संगठन के मुखिया तक वहां पर मौजूद थे, लेकिन इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को नहीं दी गई। गनीमत यह थी कि यह केवल एक संगठन था जो कि वहां पर एक घटना से नाराज होकर अपनी नाराजगी जताने के लिए आया था। संगठन के लोगों ने वहां पर स्याही फेंकी। इसके बाद अपना विरोध जताकर वहां से चले गए। अब सवाल यहां है कि यदि किसी बंदी पर उससे अदावत रखने वाले लोग हमला करते तो क्या हुआ होता? देहरादून तो नहीं लेकिन आसपास के जिलों में इस तरह की घटनाएं आम होती हैं। बावजूद इसके वहां पर सुरक्षा के इतने कम इंतजाम थे। घटना जब हुई तो इसकी संजीदगी पुलिस को समझ आई और थानों से लेकर पुलिस लाइन तक से फोर्स यहां पर तैनात कर दी गई।
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सीसीटीवी कैमरों से हो रही स्याही फेंकने वालों की पहचान

जिस जगह पर घटना हुई वहां पर कई दुकानें हैं। यहां हर रोज सुबह करीब 10 बजे से ही दुकानें खुल जाती हैं। पास में ही ट्रैफिक पुलिस के कैमरे भी लगे हुए हैं। अब इन कैमरों की फुटेज से ही स्याही फेंकने वालों की पहचान की जा रही है। ताकि, यदि कोई एफआईआर हो तो आरोपियों पर कार्रवाई की जा सके।
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