रुड़की के तत्कालीन चेयरमैन दिनेश कौशिक पूर्व सीएम एनडी तिवारी के साथ जुड़ी यादों को ताजा करते हुए बताते हैं कि पूर्व सीएम काफी संवेदनशील थे।
लोगों से बातचीत कर समस्या सुनना और उनका तात्कालिक समाधान करने की चाह उनमें हमेशा रहती थी। वर्ष 2005 के आसपास वे पूर्व सीएम के साथ दिल्ली से लौट रहे थे। तभी अचानक नारसन चौराहे पर लोगों को देखकर उन्होंने कार रुकवाई। रात के 12 बजे थे, उन्हें कुछ लोगों ने मना भी किया, लेकिन वे नहीं माने और कहा कि यही समय होता है लोगों की वास्तविक समस्या जानने का।
उन्होंने कहा कि राजा वही है जो रात में जागे। इसके बाद एनडी ढाबे की ओर बढ़ने लगे तो लोगों की भीड़ जमा हो गई। लोगों ने बताया कि लखनौता चौराहे की सड़क खस्ताहाल है। इसके बाद वे अंधेरे में चौराहे की तरफ चल पड़े और समस्या जानी। नारसन से लखनौता चौराहा, झबरेड़ा इकबालपुर होते हुए देहरादून बाईपास का चौड़ीकरण कराया गया। साथ ही सड़कों के किनारे नालों का निर्माण कराया गया।
पैसा नहीं दूंगा, पहले आप प्रोजेक्ट बनाकर लाइए, योजना अच्छी होगी तो पैसे की कोई कमी नहीं आने दूंगा। यह बात पूर्व सीएम एनडी तिवारी ने रुड़की के पूर्व चेयरमैन को उस समय कहीं, जब वे कई विकास कार्यों के लिए बजट जारी कराने उनके पास दून पहुंचे थे। इसके बाद तिवारी की ओर से शहर में कई विकास कार्यों को हरी झंडी दी गई। जिसका आज भी शहर के लोग लाभ ले रहे हैं।
पूर्व सीएम कार्य कुशलता और तकनीकी दक्षता के कितने धनी थे, इसका अंदाजा रुड़की में कई प्रोजेक्ट को हरी झंडी देने से पहले उसकी पूरी जानकारी जुटाने के हुनर से ही पता चलता है। पूर्व चेयरमैन दिनेश कौशिक बताते हैं कि नगर पालिका के पास अपना बड़ा बजट नहीं होता था, साथ ही राजस्व भी कम एकत्र होता था। उस समय सीएम रहते हुए एनडी तिवारी ने शहर के विकास के लिए कई बड़े बजट जारी किए। उन्होंने बताया कि पूर्व सीएम पहले प्रोजेक्ट रिपोर्ट देखते थे।
इसके बाद उन्हें जब लगता था कि वाकई में यह काम होना चाहिए, तभी मंजूरी देते थे। कौशिक ने बताया कि उनके सीएम रहते हुए शहर में नए पुल को मंजूरी मिली, निगम में कांप्लेक्स बनाया गया, समता पार्क और एकता पार्क का निर्माण कराया गया। कई वार्डों में कम्यूनिटी सेंटर एवं बारात घर बनवाए गए। उन्होंने बताया कि तिवारी के समय में ही शहर में पहली बार हॉट मिक्स प्लांट से सड़कें बनाने का काम शुरू हुआ था।
उत्तराखंड गठन तक हरिद्वार की पहचान तीर्थनगरी के रूप में ही थी। राज्य बनने के बाद पहली बार निर्वाचित सरकार के सीएम एनडी तिवारी बने तो उन्होंने हरिद्वार को तीर्थ के साथ उद्योगनगरी के रूप में भी पहचान दिलाई। उनके शासनकाल में ही सिडकुल की स्थापना हुई और यहां सैकड़ों उद्योग स्थापित हुए। आज इन उद्योगों से प्रदेश के साथ दूसरे राज्यों के हजारों लोगों को रोजगार मिल रहा है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहते हुए सहारनपुर से अलग करके हरिद्वार को जिला बनाने का श्रेय भी एनडी तिवारी को दिया जाता है।
सुलझे हुए राजनेता के रूप में विभिन्न पदों पर रहते हुए देश की सेवा करने वाले उत्तराखंड के पूर्व सीएम नारायण दत्त तिवारी के निधन से पूरे देश के साथ उत्तराखंड में भी शोक की लहर है। उनके निधन के बाद उन्हें सबसे ज्यादा याद हरिद्वार के लोग कर रहे हैं। हरिद्वार जिले ने विकास के जो आयाम छूए उसमें सबसे ज्यादा योगदान एनडी तिवारी का है। उत्तराखंड बनने के बाद ही नहीं उससे पहले ही उन्होंने जिले के विकास की नींव रख दी थी। उन्होंने उत्तर प्रदेश के सीएम रहते समय हरिद्वार को अलग जिला बनाया। वर्ष 1988 में जब यूपी के सीएम के रुप में उनका कार्यकाल अंतिम चरण में था तो हरिद्वार के पुराने कांग्रेसियों की मांग पर एनडी तिवारी ने 28 दिसंबर 1988 को अलग जनपद का गठन किया था।
वर्ष 2000 में जब उत्तराखंड अलग राज्य बना तो पहले विधानसभा चुनाव को जीतकर जब कांग्रेस को सत्ता मिली तब वरिष्ठतम नेता नारायण दत्त तिवारी को कांग्रेस हाईकमान ने प्रदेश का सीएम बनाया। उसी समय एनडी तिवारी ने अपनी विकास पुरुष की छवि के अनुरुप निर्णय लेते हुए जिला मुख्यालय से सटे रोशनाबाद गांव के पास बंजर भूमि पर औद्योगिक नगर का निर्माण कराया। इसके अलावा भगवानपुर, लक्सर और मंगलौर के आसपास भी उद्योग लगवाए। इन उद्योगों के लगने के बाद युवाओं को सिर्फ रोजगार नहीं मिला बल्कि आसपास के इलाकों की तस्वीर भी बदल गई। आज हजारों ग्रामीणों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला हुआ है। हरिद्वार मैन्यूफैक्चर्स के अध्यक्ष हरेंद्र गर्ग ने पूर्व सीएम एनडी तिवारी के निधन को औद्योगिक जगत के बड़े हितैषी युग का अंत बताया। उन्होंने कहा कि सिडकुल की स्थापना कर उन्होंने विकास का बड़ा अध्याय लिखा। उद्योगपति मनमोहन जैन, रंजीत जालान, विकास गर्ग, हिमेश कपूर, अरविंद चौहान आदि ने एनडी तिवारी के निधन पर शोक जताया।