मुलायम सिंह यादव कांग्रेस के दिग्गज नेता नारायण दत्त तिवारी को एक बार फिर समाजवाद का चोला पहनाना चाहते हैं। 89 साल के नारायण दत्त तिवारी का अपनी पार्टी में रसूख भले ही कम हुआ हो लेकिन अन्य दलों में अभी राजनैतिक दमखम रखते हैं।
चुनाव लड़ने के इच्छुक
दरअसल तिवारी ने पहला चुनाव 1971 में सोशलिस्ट पार्टी से नैनीताल-बहेड़ी लोकसभा का लड़ा था। उसके बाद ही वह कांग्रेस में शामिल हुए। तिवारी इस बार चुनाव लड़ने के तो इच्छुक हैं लेकिन अभी समाजवादी के लिए दरवाजे नहीं खोल रहे।
लंबे समय से ऐसी खबरें आ रही हैं कि तिवारी की नजदीकियां समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव से बढ़ी हैं। समाजवादी पार्टी तिवारी की प्रधानमंत्री बनने की टीस पर कुछ मरहम भी लगाना चाहती है।
सपा कर सकती है तिवारी का बेहतर इस्तेमाल
1991 में तिवारी नैनीताल से ऐसे समय पर चुनाव हारे जब उन्हें प्रधानमंत्री पद का मजबूत उम्मीदवार माना जा रहा था। बीजेपी के बलराज पासी ने उन्हें करीब 13 हजार वोटों से हराया लेकिन तब मुलायम सिंह के जनता दल उम्मीदवार महेन्द्र पाल ने वोट काटकर तिवारी की राह रोक दी थी।
समाजवादी पार्टी भी चाहती है कि उत्तराखंड में जड़े जमाने के लिए तिवारी का इस्तेमाल बेहतर विकल्प है। नैनीताल सीट से तिवारी को चुनाव लड़ाकर पार्टी यहां नए जातीय समीकरण बना सकती है।
नैनीताल सीट में पर्वतीय और गैरपर्वतीय इलाके आते हैं। यहां मुस्लिम मतदाताओं के साथ पिछड़े वर्ग के मतदाताओं की खासी संख्या है। पार्टी को लगता है कि तिवारी को लड़ाकर पर्वतीय और ब्राह्मण मतदाताओं को चुनावी समीकरण सीट निकाली जा सकती है।