पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी खुद स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रहे थे, इसलिए वह सल्ट अल्मोड़ा खुमाड़ में पांच सितंबर के शहीद दिवस जैसे आयोजनों में पहुंचने की हरसंभव कोशिश करते थे।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहते हुए लखनऊ से उड़ा उनका हेलीकॉप्टर सल्ट में नहीं उतर पाया तो यहां एमपीआईसी के मैदान में उन्हें उतरना पड़ा। तब उस मैदान में बच्चों के सिवा कोई नहीं था। बच्चों ने उन्हें पहचान लिया। तब उनके साथ इनकी पत्नी डॉ. सुशीला तिवारी भी साथ थीं। तब बच्चे ही उन्हें प्रधानाचार्या के कमरे में ले गए। तब प्रधानाचार्या ने टैक्सी से उन्हें खुमाड़ के लिए भिजवाया।
वहीं, खुली जीप से शहीद दीवान सिंह बिष्ट को श्रद्धांजलि देने कोटाबाग ब्लॉक के डौन परेवा गांव जाते समय बागाजाला के पास नाला उफान पर आया तो वह लोनिवि के ट्रक पर चढ़कर डौन परेवा पहुंचे। इसके बाद ही इस वन मोटर मार्ग का डामरीकरण हो सका।