पहाड़ों की रपटीली राहों पर बाइक चलाना कभी भी आसान नहीं है। ऐसे में यहां का एक युवक न केवल आसानी के साथ बाइक चलाता है, बल्कि उसके द्वारा दोनों हाथ छोड़कर बाइक चलाना, देखने वालों में सिहरन भी पैदा करता है।
उत्तराखंड में चंपावत के नवीन सिंह कार्की कई बार ये कारनामा कर चुके हैं। इसके चलते इस नौजवान ने लिम्का बुक, इंडिया बुक और एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में मुकाम पाया है। नवीन की उपलब्धियों में एक और उपलब्धि शामिल हो रही है। वियतनाम के एक विश्वविद्यालय ने उन्हें डॉक्टरेट की मानद उपाधि के लिए चयनित किया है।
चंपावत से लगे खर्ककार्की के हयात सिंह कार्की के बेटे नवीन कार्की (35) के लिए 2007 से बाइक की सवारी जुनून है। बाइक के साथ नए-नए प्रयोग करना उनका शौक रहा है। तेज गति से बाइक चलाने से एक कदम आगे बढ़कर उन्होंने हाथ छोड़कर सवारी की राह चुनी।
2009 में देहरादून से मसूरी के 70 किलोमीटर के आने और जाने के फासले को नवीन ने हाथ छोड़कर पूरा किया। यह उनका पहला सफर था। इसके बाद 2011 में चंपावत से घाट तक 50 किलोमीटर का सफर हैंडफ्री (हाथ छोड़कर) बाइक से तय किया।