राजकीय हाईस्कूल पुड़कुनी के प्रधानाचार्य डॉ. केवलानंद कांडपाल का राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए चयन हुआ है। उनको यह पुरस्कार बालिका शिक्षा में विशेष योगदान और शिक्षा के विकास में उल्लेखनीय कार्य करने के लिए दिया जा रहा है। वर्ष 2012 में डॉ. कांडपाल को शैलेश मटियानी पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।
मूलरूप से बागेश्वर के खुनौली निवासी डॉ. कांडपाल ने 10 अक्तूबर 1990 को चमोली जिले के जीआईसी गोपेश्वर से वाणिज्य प्रवक्ता के रूप मे कॅरिअर शुरू किया। पांच अगस्त 2006 को वह जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान बागेश्वर में स्थानांतरित होकर आए। वह एटीआई नैनीताल के राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षक भी हैं। राज्य की कक्षा चार से आठ तक की पुस्तकों में उनका लेखनीय योगदान में रहा है।
डायट में भी उन्होंने बीटीसी और डीएलएड का शत प्रतिशत परिणाम दिया। डॉ. कांडपाल 2017 में पदोन्नत होकर दुर्गम राजकीय हाईस्कूल पुड़कुनी के प्रधानाचार्य बने। उन्होंने बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए लोगों को जागरूक किया। विद्यालय में मां-बेटी सम्मेलन शुरू करवाया। उनका प्रयास रंग लाया और पहले ही साल विद्यालय छोड़ चुकी दो छात्राओं ने फिर से प्रवेश ले लिया।
विद्यालय में मतदाता साक्षरता क्लब और जूनियर रेडक्रॉस की स्थापना की। उन्होंने विद्यालय में कई व्याख्यान आयोजित कर शिक्षा का महत्व बताया। वह रेडक्रॉस के सदस्य होने के चलते सामाजिक गतिविधियों में सदैव योगदान देते है। राष्ट्रीय स्तर के विभिन्न शोध और उनके प्रकाशन के लिए भी उन्हें जाना जाता है। इस उपलब्धि पर राजकीय शिक्षक संघ के मंडल अध्यक्ष विजय गोस्वामी, डायट के प्रवक्ता कैलाश प्रकाश चंदोला, राशिसं के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य आलोक पांडेय आदि ने खुशी जताई है।