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Dehradun News: उत्तराखंड में संस्कृत आयोग के गठन पर राष्ट्रीय मंथन, विशेषज्ञों ने दिए सुझाव

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देहरादून। प्रदेश में संस्कृत के संरक्षण और भारतीय ज्ञान परंपरा के समग्र विकास के लिए एक उच्च स्तरीय संस्कृत आयोग का गठन किया जाएगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर इसे लेकर सचिवालय में संवाद एवं परामर्श बैठक की गई। इसमें देश के प्रमुख संस्कृत विद्वानों, शिक्षाविदों और नीति-विशेषज्ञों ने आयोग की संरचना, उद्देश्य और कार्ययोजना पर सुझाव दिए।
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संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने प्रदेश में संस्कृत भाषा और शिक्षा की वर्तमान स्थिति का विवरण प्रस्तुत किया। सचिव ने बताया कि राज्य सरकार संस्कृत के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है। सात जनवरी, 2010 को संस्कृत भाषा को उत्तराखंड की द्वितीय राजभाषा का संवैधानिक दर्जा दिया गया था। बैठक में सुझाव दिया गया कि प्रस्तावित आयोग केवल संस्कृत भाषा के संरक्षण तक सीमित न रहे। यह भारतीय ज्ञान परम्परा, वैदिक अध्ययन, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा दे। आयोग कौशल विकास, उद्यमिता एवं रोजगारोन्मुखी संस्कृत शिक्षा की दिशा में भी कार्य करे। संस्कृत के व्यापक जनजागरण के लिए राष्ट्रीय स्तर पर संस्कृत विजय यात्रा आयोजित करने का सुझाव दिया गया। देशभर के संस्कृत विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के सहयोग से एक समन्वित राष्ट्रीय कार्ययोजना बनाने पर बल दिया गया।
बैठक में प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में संस्कृत और हिन्दू अध्ययन विभाग अनिवार्य रूप से स्थापित करने का सुझाव मिला। संस्कृत भाषा में अधिकाधिक राजकीय कार्य किए जाएं और विभागों में संस्कृत अनुवादकों की नियुक्ति हो। विशेषज्ञों ने वैदिक ऋषियों और महान आचार्यों के नाम पर अध्ययन पीठों की स्थापना की बात कही। प्रदेश में संवादात्मक संस्कृत शिक्षण केंद्र विकसित करने पर भी जोर दिया गया।
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