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गंगा में गंदगी गिरा रहे आश्रमों पर NGT सख्त

Mon, 04 May 2015 09:20 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, रुड़की
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गंगा में गंदगी गिरा रहे आश्रमों पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) का रुख सख्त है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से पहले किए गए सर्वे की रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं होने पर एनजीटी ने दोबारा बारीकी से सर्वे करवाया है।
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एनजीटी के आदेश पर संयुक्त टीम ने बड़े आश्रमों और होटलों से 50 से अधिक सैंपल लिए हैं। इसकी रिपोर्ट तैयार की जा रही है। 15 मई से पहले एनजीटी के सामने यह रिपोर्ट पेश की जाएगी। एनजीटी ने कहा है कि रिपोर्ट में यह बताया जाए कि बड़े आश्रम और होटल गंगा में किस तरह और कितनी गंदगी डाल रहे हैं।

इसे तुरंत रोके जाने के लिए क्या कार्ययोजना बनाई जा सकती है। इसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। मकसद गंगा में गिर रही गंदगी को हर हाल में रोकना है।
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दरअसल, एनजीटी के आदेश पर 11 से 15 फरवरी के बीच प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने हरिद्वार और ऋषिकेश के 22 आश्रमों का सर्वे किया था। सर्वे रिपोर्ट में यह साफ हुआ था कि अधिकतर आश्रमों द्वारा गंगा में गंदगी बहाई जा रही है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि हरिद्वार और ऋषिकेश में स्थापित सैकड़ों आश्रमों में से महज पांच आश्रमों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाए गए हैं।

इस रिपोर्ट पर एनजीटी ने बीते नौ अप्रैल को सुनवाई की थी। सूत्रों के अनुसार इस दौरान एनजीटी ने कहा कि इस रिपोर्ट से बहुत कुछ स्पष्ट नहीं हो पा रहा है। ऐसे में एनजीटी ने संयुक्त टीम का गठन कर बड़े आश्रमों का बारीकी से इस प्रकार सर्वे किया जाए कि गंगा में गंदगी बहाए जाने की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सके।

रिपोर्ट इस तरह तैयार की जाए कि आश्रमों से गंगा में गिर रही गंदगी की समस्या का निदान किया जा सके। इसके लिए व्यापक कार्ययोजना प्रस्तुत किए जाने के भी निर्देश दिए गए हैं। इसके मद्देनजर हाल ही में बोर्ड मुख्यालय और पर्यावरण मंत्रालय की संयुक्त टीम ने सर्वे का काम पूरा कर लिया है। बताया गया है कि टीम ने 50 सैंपल लिए हैं। जिस पर रिपोर्ट तैयार की जा रही है।

इन विभागों ने किया सर्वे
दोबारा सर्वे के लिए गठित संयुक्त टीम में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय देहरादून के संयुक्त निदेशक और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वैज्ञानिक शामिल थे।

हरिद्वार-ऋषिकेश में गंगा पहले किनारे स्थित 22 बड़े आश्रमों का सर्वे किया गया था, उनमें से महज पांच आश्रमों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाए गए हैं। बाकी की गंदगी सीधे गंगा में गिरती पाई गई।
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- डॉ. अंकुर कंसल, क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी
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