चंपावत में बालकों की तुलना में बेटियों की संख्या कम
अल्मोड़ा में जहां 1,444 बालिकाओं का जन्म हुआ, जबकि चमोली में 1,026, नैनीताल में 1,136, पौड़ी में 1,065 व ऊधमसिंह नगर में 1,022 बालिकाओं का जन्म हुआ, लेकिन देहरादून, टिहरी व चंपावत में बालकों की तुलना में बेटियों की संख्या कम है।
राज्य में बाल लिंगानुपात में लगातार सुधार हो रहा है। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के साथ गर्भवती महिलाओं को संस्थागत प्रसव कराने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रदेश में भ्रूण जांच के लिए पीसीपीएनडीटी अधिनियम का सख्ती से पालन कराया जा रहा है। बाल लिंगानुपात में उत्तराखंड में शीर्ष राज्यों में शामिल है। -डाॅ. धन सिंह रावत, स्वास्थ्य मंत्री
पीसीपीएनडीटी में ये सजा का प्रावधान
भ्रूण जांच में किसी भी पंजीकरण चिकित्सक या प्रसूति विशेषज्ञ के पहली बार दोषी पाने पर तीन वर्ष तक की कैद और 10 हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान है, जबकि दूसरी बार दोषी पाए जाने पर पांच वर्ष की कैद व 50 हजार रुपये जुर्माने के साथ चिकित्सक का पंजीकरण पांच वर्ष के लिए समाप्त किया जा सकता है। तीसरी बार में चिकित्सक का पंजीकरण हमेशा के लिए रद्द कर दिया जाएगा। इसके अलावा पांच साल की कैद और एक लाख जुर्माने का प्रावधान है।