गर्व आज हमें इस बात पर करना चाहिए कि उत्तराखंड प्रदेश के दो बच्चे बहादुरी पुरस्कार के लिए चुने गए हैं। इन बच्चों को 24 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पुरस्कृत करेंगे। इसके बाद ये गणतंत्र दिवस परेड में हिस्सा लेंगे।
पहली चमोली की मोनिका जिसने एक बच्चे को बचाने के लिए अलकनंदा में छलांग लगा दी और उसको बचाते हुए खुद जान दे दी। दूसरा ऋषिकेश का लाभांशु जिसने नहर में डूबते दो सैलानियों को बचाया।
शर्म हमें इस बात पर करना चाहिए कि मौत के ये मुहाने आज भी खुले हुए हैं। जहां मोनिका की जान गई, वहां आज भी पहले जैसा ही खतरा बरकरार है तो जहां लाभांशु ने जान की बाजी लगाई, वो जानलेवा जगह आज भी जस की तस है।
यानी डूब मरने के रास्ते बंद नहीं हुए हैं और शासन-सत्ता में बैठे जिम्मेदार लोगों के शर्म से डूब मरने के भी।