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नन्हें जांबाजों के ऐसे किस्से जो उड़ा देंगे सबके होश

Tue, 07 Oct 2014 04:17 PM IST
बिशन सिंह बोहरा / अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड के इन नन्हें जांबाजों की बहादुरी के किस्से पढ़कर आप हैरत में पड़ जाएंगे। इन बच्चों के नाम राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार के लिए भेजे गए हैं। इन बच्चों में चमोली के कालेश्वर गांव की मोनिका, मथकुड़ीसैंण भिलंगना टिहरी गढ़वाल का अर्जुन सिंह, हरिद्वार का कमल और पौड़ी का सिद्धार्थ शामिल है।
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चारो बच्चों ने अत्यंत विषम हालातों में अपूर्व वीरता का परिचय दिया था। मोनिका ने जहां उफनाती अलकनंदा में जिंदगी से जूझ रहे छोटे भाई की जान बचाने के लिए अपनी जिंदगी गंवा दी थी। अर्जुन ने मां पर हमला करने वाले गुलदार के दांत खट्टे करके उसे भागने पर मजबूर कर दिया था।

सिद्धार्थ ने अपने ऊपर हमला करने वाले गुलदार से गुत्थमगुत्था होकर उसे भगा दिया था। कमल ने गड्ढे में पलटी स्कूल बस से अपने नौ साथियों की जान बचाकर जांबाजी की गौरवगाथा लिखी थी।
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उत्तराखंड राज्य बाल कल्याण परिषद की ओर से इन बच्चों के नाम पुरस्कार के लिए राष्ट्रीय बाल कल्याण परिषद को भेजे गए हैं। अंतिम चयन के बाद गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति द्वारा इन बच्चों को दिल्ली में पुरस्कृत किया जाएगा।

उफनती नदी में कूद पड़ी मोनिका

उफनाती अलकनंदा में जिंदगी से जूझ रहे छोटे भाई की जान बचाने कूद पड़ी मोनिका की बहादुरी को अब पहचान मिल सकेगी।

मोनिका ने भाई को तो बचा लिया था, लेकिन उसकी अपनी सांसें उखड़ गईं। उत्तराखंड राज्य बाल कल्याण परिषद ने चमोली की इस किशोरी का नाम राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार के लिए भेजा है।

मोनिका के अलावा तीन अन्य बच्चों के नाम भी पुरस्कार के लिए भेजे गए हैं। राष्ट्रीय स्तर पर अंतिम चयन के बाद गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति द्वारा इन बच्चों को दिल्ली में पुरस्कृत किया जाएगा। परिषद के महासचिव बालकृष्ण डोभाल की ओर से हाल में प्रदेश के बहादुर बच्चों के नाम भारतीय बाल कल्याण परिषद को भेजे गए हैं।

इनमें चमोली के कालेश्वर गांव की मोनिका (17) का नाम भी शामिल है। मोनिका 15 जून को गांव के पास अलकनंदा नदी में कपड़े धोने के लिए गई थी। दो छोटी बहनें और दस वर्षीय भाई साहिल भी उसके साथ थे। इस दौरान साहिल नदी में नहाने लगा और तेज बहाव में बहने लगा।

साहिल की चीखें सुन मोनिका ने नदी में छलांग लगा दी। उफनाती धाराओं के बीच उसने साहिल को तो किनारे लगा दिया, लेकिन खुद को बचा नहीं सकी। मोनिका के पिता विकलांग हैं और उसके दादा की पेंशन से परिवार का गुजारा चलता है।

कमल ने अपने नौ सहपाठियों को दी नई जिंदगी

राजकीय इंटर कालेज मथकुड़ीसैंण भिलंगना टिहरी गढ़वाल के ग्यारहवीं का छात्र अर्जुन सिंह 16 जुलाई 2014 को घर में था। उसकी मां गाय को चारा डाल रही थी तभी गुलदार ने हमला कर दिया।

मां का शोर सुन अर्जुन तुरंत गोशाला के पास पहुंचा और दरांती से गुलदार पर ताबड़तोड़ प्रहार किए। आखिर गुलदार भाग निकला।

कमल ने दी नौ को नई जिंदगी
प्रदेश से भेजे गए बच्चों की सूची में कमल भी शामिल है। हरिद्वार के सेंट जेपी कान्वेंट पब्लिक स्कूल के इस 12 वर्षीय छात्र ने अपने नौ सहपाठियों को नई जिंदगी दी।

14 फरवरी 2013 को कमल साथियों संग स्कूल बस से घर लौट रहा था। लक्सर के रायसी क्षेत्र में अचानक बस अनियंत्रित होकर गड्ढे में जा गिरी। कमल ने नौ छात्रों को सुरक्षित निकाला था।
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सिद्धार्थ ने गुलदार से किया मुकाबला

प्राथमिक विद्यालय मंदोली जनपद पौड़ी गढ़वाल में कक्षा चार में पढ़ने वाला नौ वर्षीय सिद्धार्थ 12 अप्रैल वर्ष 2014 को शाम सात बजे घर के बाहर आंगन में खेल रहा था।

हल्का अंधेरा होने लगा था, तभी गुलदार ने सिद्धार्थ पर हमला कर दिया। लेकिन सिद्धार्थ इससे घबराया नहीं और उससे गुत्थमगुत्था हो गया। इस बीच ग्रामीण जुटे तो गुलदार भाग गया।
 
मोनिका की दो छोटी बहनें हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति खराब है। उत्तराखंड राज्य बाल कल्याण परिषद मोनिका की दोनों बहनों को हरसंभव सहायता प्रदान करेगा। मोनिका का नाम मरणोपरांत राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार के लिए भेजा जा रहा है। बाकी तीनों बच्चों की बहादुरी भी प्रदेश के बच्चों के लिए प्रेरणादायी है। हालांकि, पुरस्कार पर अंतिम चयन राष्ट्रीय बाल कल्याण परिषद को ही करना है।
- कमलेश्वर प्रसाद भट्ट, संयुक्त सचिव उत्तराखंड राज्य बाल कल्याण परिषद
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