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उत्तराखंड के खेतों में लहराएगा नासिक का प्याज

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विकासनगर। इस साल से प्रदेश के खेतों में नासिक के प्याज की खेती हो सकेगी। इसके लिए कृषि विज्ञान केंद्र ढकरानी के वैज्ञानिकों ने अपनी पौधशाला में एग्री फाउंड लाइट रेड वैरायटी के बीज की पौधों को विकसित किया है। आमतौर पर इस वैरायटी का प्याज सिर्फ नासिक में पैदा होता है लेकिन, इस साल नेशनल हॉट्रीकल्चर रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर की अनुशंसा पर केंद्र वैज्ञानिकों ने उक्त बीज की पौधों को विकसित किया है। अपने लाल रंग के लिए पहचान रखने वाली प्याज की यह वैरायटी तलहटी और पर्वतीय इलाकों में काश्तकारों के लिए खासा फायदे का सौदा साबित हो सकती है। विभिन्न गुणों से भरपूर इस प्याज का साइज औसतन होता है। जिसके एक बल्ब का भार करीब 150 ग्राम तक होता है। इसमें सल्फर भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसके साथ ही स्टोरेज के दौरान इस प्याज में अंकुरण नहीं होता है।
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कृषि विज्ञान केंद्र ढकरानी के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. एके शर्मा ने बताया कि प्याज के इस पौध के अच्छे रिजल्ट देखने को मिले है। जिसके चलते इस साल काश्तकारों को इस बीज के पौध लगाने की सलाह दी जा रही है।
प्याज की पौध को ढीली करनी होगी जेब
विकासनगर। कृषि विज्ञान केंद्र ढकरानी के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. एके शर्मा ने बताया कि इस साल काश्तकारों को प्याज के बीज के लिए खासा मशक्कत करनी पड़ सकती है। क्षेत्र में जिन लोगों ने प्याज की पौध की नर्सरी लगाई थी। उनकी पौध अक्तूबर और नवंबर में मौसम के उतार-चढ़ाव भरा रहने के कारण मुरझा गई है। जिस कारण इस साल बहुत कम जगह पर ही प्याज की पौध उपलब्ध हुई है। कहा कि सेंटर को भी कोरोना महामारी के चलते 2300 रुपये प्रति किलो के हिसाब से प्याज का बीज खरीदना पड़ा है। कहा कि इस साल केंद्र से पौध खरीदने वाले लोगों को प्रति किलो 70 रुपये अधिक चुकाने होंगे। बीते साल सेंटर ने 80 रुपये प्रति किलो की दर पर प्याज की पौध बेची थी लेकिन, इस साल 150 रुपये प्रति किलो की दर से यह पौध बेची जाएगी।
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15 दिसंबर से मिलेगी पौधी
विकासनगर। केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. एके शर्मा ने बताया कि क्षेत्रीय काश्तकार 15 दिसंबर से केंद्र से प्याज की पौध खरीद सकते हैं। 15 दिसंबर तक प्याज पूरी तरह से खेतों में बोने के लिए तैयार हो जाएगी।
बढ़ रहा प्याज की खेती का दायरा
विकासनगर। केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. एके शर्मा ने बताया कि बीते 10 साल में देहरादून जिले में प्याज की खेती में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। क्षेत्र में बढ़ी तेजी से प्याज का बाजार तैयार हो रहा है। एक अनुमान के मुताबिक क्षेत्र में 250 हेक्टेयर से अधिक भू-भाग में प्याज की खेती की जाती है।
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