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नारी निकेतन शोषण केस में अभी एक तीर बाकी

Tue, 15 Dec 2015 01:46 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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देहरादून नारी निकेतन में संवासिनी से शारीरिक शोषण और गर्भपात मामले में निलंबित अधीक्षिका समेत आठ कर्मचारियों को जेल भेजने के बाद भी पुलिस के तरकश में अभी एक तीर बाकी है।
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संदेह के दायरे में एक शख्स और है, लेकिन साक्ष्य के अभाव में उस पर कानूनी शिकंजा नहीं कसा जा सका है। यदि डीएनए मिलान में रिपोर्ट पॉजीटिव नहीं आती है तो पुलिस उस पर शिकंजा कस सकती है। संवासिनी मामले में पुलिस की कार्रवाई अंतिम चरण में है।

कर्मचारियों के बाद पुलिस ने रविवार को निलंबित अधीक्षिका मीनाक्षी पोखरियाल और टीचर अनिता मैंदोला को साक्ष्य मिटाने के आरोप में जेल भेज दिया। पुलिस भ्रूण और दुराचार के आरोपियों की डीएनए मिलान की रिपोर्ट आने तक विवेचना जारी रखना चाहती है, ताकि रिपोर्ट के नतीजे पर कार्रवाई में बदलाव किया जा सके।
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हालांकि, पुलिस की योजना जेल में बंद केयर टेकर हाशिम और होमगार्ड ललित बिष्ट के साथ एक तीसरे का भी डीएनए मिलान कराने की थी, लेकिन साइन लैंग्वेज में लिए गए संवासिनी के 164 के बयानों में उन दोनों पर ही ज्यादा जोर था। काफी प्रयासों के बाद संदेह के दायरे में उस शख्स के खिलाफ साक्ष्य नहीं मिल सके। फिर भी वह पुलिस की निगरानी में है।

सूत्रों का कहना है कि इस शख्स का आखिरी तीर तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। यदि किसी कारण से डीएनए मिलान नहीं होता है तो उस शख्स को सामने लाकर उसका भी सैंपल लिया जा सकता है।

नारी निकेतन मामले की विवेचना चल रही है। कुछ कहा नहीं जा सकता है कि आगे किसी के खिलाफ कार्रवाई होगी या नहीं। यदि नए तथ्य आएंगे तो उसके हिसाब से कार्रवाई की जा सकती है। अब तक जिनके खिलाफ साक्ष्य आए, उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है।
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- अजय सिंह, पुलिस अधीक्षक नगर
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