पिथौरागढ़ को अगर उत्तराखंड का स्वर्ग कहा जाए तो गलत नहीं होगा। यहां की ऊंची-ऊंची चोटियां बरबस ही अपनी ओर खींचती हैं। इस वीकेंड आप पिथौरागढ़ की हसीन वादियों में समय बिता सकते हैं।
आश्रम का वातावरण शांत
पिथौरागढ में आप नारायण आश्रम जाकर अपने जीवन को रिचार्ज कर सकते हैं। यह आश्रम पिथौरागढ़ से 44 किमी. दूर है। यहां आकर अत्यंत शांती का अनुभव होता है। हरे भरे जंगलों के बीच होने से इस आश्रम का वातावरण एकदम शांत है।
इस आश्रम में हर साल हजरों की संख्या में विदेशी और देसी पर्यटक आते हैं और यहां ध्यान कर आत्म शांति प्राप्त करते हैं। यहां से कुछ दूरी पर तवाघाट में धौलीगंगा और कालीगंगा का संगम होता है।
सर्दी और बरसात में बंद रहता है आश्रम
यह आश्रत 1936 में श्री नारायण स्वामी ने स्थापित किया था। यहां पर 40 लोगों के रहने की सुविधा उपलब्ध है। सर्दियों के मौसम भारी बर्फबारी होने के कारण यह आश्रम बंद कर दिया जाता है।
और बरसात में सड़क खराब होने से यह आश्रम बंद रहता है। आश्रम में आने वाले लोगों को विभिन्न आध्यात्मिक क्रियाएं कराई जाती हैं।
नारायण आश्रम के अलावा आप पिथौरागढ़ फोर्ट, कपिलेश्वर महादेव मंदिर, रामताल गार्डन, अस्कोट सेंच्युरी, हाट कालिका मंदिर, ध्वज मंदिर, अर्जुनेश्वर मंदिर व पालात भुवनेश्वर की भी सैर कर सकते हैं।
कैसे जाएं...
आप टैक्सी व बस द्वारा नाराण आश्रम जा सकते हैं। यह है आश्रम का रूट- देहरादून-हल्द्वानी-अल्मोड़ा-बाड़ेछीनी-धौलछीनी-सेलाधार-बेरीनाग-बैंड-थल-डीडीहाट-नारायण आश्रम।