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खराब मौसम के बीच बेदनी पहुंची मां नंदा

Mon, 01 Sep 2014 01:55 PM IST
बेदनी से सुधाकर भट्ट/रमेश जोशी
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रविवार को ठीक तीन बजे भगवती नंदा 14वें पड़ाव बेदनी पहुंची। बेदनी में देवी के स्थान को लेकर कुछ विवाद की स्थिति भी बनी लेकिन फिर सुलह हो गई। आधे घंटे में नंदा अपने स्थान पर विराजमान हो गईं।
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मौसम विभाग ने जारी किया था अलर्ट
खराब मौसम भी उत्साह और आस्था से भरे यात्रियों के कदम नहीं रोक सका। रविवार को करीब 40 से 45 हजार लोग बेदनी में मौजूद थे। मौसम विभाग ने बेदनी में दो दिन का अलर्ट जारी किया है। गैरोली पातल में व्यवस्था को लेकर डोली और छंतोलियों के साथ आए लोग नाराज थे। बेदनी में भी हाल यही रहा।

गैरोली पातल से परंपरा को लेकर भी नया विवाद उठ खड़ा हुआ है। दरअसल राजजात में कुरूड़ की मां भगवती के साथ-साथ दशोली की अन्य डोलियां भी शामिल हैं। अपनी-अपनी जगह बनाने के लिए यात्री एक पड़ाव पहले ही पहुंच जा रहे हैं। यही हाल छंतोलियों का भी है। ऐसे में मां नंदा की डोली के सबसे आगे रहने की परंपरा के भी उल्लंघन की बात हो रही है।
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बेदनी में शनिवार को ही लाता की भगवती और दशमद्वार की डोली पहुंच गई थी। दशमद्वार की डोली जिस स्थान पर विराजमान हुई, वह स्थान कुरूड़ के लोगों के मुताबिक कुरूड़ की मां भगवती के लिए चयनित है। रविवार को तीन बजे कुरूड़ की नंदा जब यहां पर पहुंची, तो इस स्थान को लेकर विवाद हो गया।

दशोली की डोली के साथ आए पंडितों का कहना है कि राजजात में दशोली की भगवती भी मुख्य रूप से शामिल होती है। हालांकि बाद में कुरूड़ की नंदा के लिए स्थान छोड़ दिया गया। परंपरा को लेकर बढ़ते मतभेद के चलते एक बार तो कुरूड़ के लोगों ने भगवती को आगे ले जाने से इंकार कर दिया था। लेकिन फिर समझौता हो गया।

लाता की भगवती रविवार सुबह ही बेदनी से अपने अगले पड़ाव के लिए लौट चुकी हैं। नंदा की यात्रा का अगला पड़ाव पातरनचौंण्यि है। बड़ी संख्या में यात्री और छंतोलियां पहले ही यहां के लिए रवाना हो चुकी है। स्थिति यह है कि कई नंदा भक्त और छंतोलियां तो पातरनचौण्यि से आगे के पड़ाव शिलासमुद्र तक पहुंच गए हैं।

मखमली बुग्याल बना मिट्टी का मैदान
नंदा की यात्रा में हिमालयी उच्च क्षेत्र में उमड़ा जनसैलाब इस संवेदनशील क्षेत्र के लिए खतरा बन रहा है। रविवार को मखमली बुग्याल से हरे-भरे क्षेत्र का अधिकांश हिस्सा मिट्टी का मैदान नजर आया, जिसे हजारों पैर लगातार रौंद रहे थे।

वाण से आगे शुरू इस हिमालयी क्षेत्र को प्रकृति ने अलौकिक नेमतें दी हैं, लेकिन यात्रा के नाम पर उमड़ रही लोगों की भीड़ से यह क्षेत्र भी सुरक्षित नहीं रह गए हैं। मुख्यमंत्री हरीश रावत की अपील के बाद भी बेदनी में रविवार को 40 से 45 हजार लोग उमड़ पड़े। इससे बुग्याल की घास को भारी नुकसान पहुंचा है।

गैरोली से बेदनी के बीच करीब तीन हजार से अधिक फूलों की किस्में भी हैं, जो इस भीड़ की भेंट चढ़ गई हैं। पूर्व में भी यहां पर्यटकों की आमद बढ़ने से भूस्खलन और प्लास्टिक कचरे की शिकायतें सामने आई हैं। इसके बावजूद प्रशासन के भारी लाव-लश्कर के बेदनी में होने के बाद भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया है।
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