वाण से नंदा की कैलास की विदाई का माहौल हो जाता है। वाण के बाद नंदा की यह यात्रा जहां प्रकृति के साक्षात दर्शन कराती है, वहीं यात्रा के कई रहस्यों से भी भक्तों को अवगत कराती है। गैरोली पातल का भी इस यात्रा में विशेष महत्व है।
मान्यता है कि यहां पर मां नंदा ने राक्षसों का वध किया था। राक्षसों का मांस खाने के लिए गरुड़ आए थे, तभी से इस स्थान का नाम गैरोली पातल पड़ा, जिसका लोक जागरों में भी उल्लेख है।
नंदा की यह यात्रा गांव से लेकर हिमालय तक के सफर में एक के एक बाद कई कथाओं को समेटे हुए है। यात्रा से जुड़े हर पड़ाव में नंदा विभिन्न रूपों में पूजी जाती हैं। नंदा एक ओर बेटी है तो वहीं पिंडर और कैल घाटी में बहू हैं।