प्रकृति से जैसा व्यवहार किया जाएगा, उसका वैसा ही फल सामने आएगा। नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क की मौजूदा स्थिति इस बात को साबित कर दिखाने के लिए काफी है। एक समय था जब पार्क में वनों एवं वन्यजीवों की कई प्रजातियां लुप्त होने की कगार पर पहुंच चुकीं थीं या खत्म हो चुकीं थीं।
उस वक्त पार्क की बदहाली को देखते हुए केंद्र सरकार ने वर्ष 1983 में पार्क में आवाजाही पर रोक लगा दी थी। इसके बाद से इस पार्क में न तो पर्वतारोहण हुआ न ही पर्यटकों की आवाजाही। 32 साल की इसी बंदिश का नतीजा है कि अब यह पार्क फिर से गुलजार होने लगा है।
यूनेस्को की विश्व धरोहर और देश की दूसरी सबसे ऊंची पर्वत चोटी (7816 मीटर नंदा देवी पर्वत चोटी) वाले नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क में एक समय विलुप्त मानी जा रही वन एवं वन्यजीवों की प्रजातियां देखने को मिली हैं।
पार्क में फिर से दिखने लगीं लुप्तप्राय प्रजातियां
यह जानकारी पार्क का दौरा कर लौटी 31 सदस्यीय टीम ने दी है। बता दें कि यह दल बीती 10 जून से 6 जुलाई तक पार्क में दौरे के लिए गया था।
पार्क में जाने से पहले वर्ष 1993 की रिपोर्ट की स्टडी की गई थी। उस वक्त यहां सन्नाटा था। तमाम प्रजातियां खत्म हो चुकी थीं और कई खात्मे के कगार पर थीं। इस साल स्टडी के मुताबिक पार्क में रौनक लौट चुकी है। पार्क गुलजार होने लगा है।
-साकेत बडोला, कार्बेट के उप निदेशक और पार्क जाने वाली टीम के सदस्य।
पार्क में वर्ष 1993 में 114 पक्षियों की प्रजातियां देखी गई थीं। वर्ष 2003 में गए दल ने 51 प्रजातियां देखी थीं, जबकि इस बार 130 प्रजातियां देखी गई हैं। वनस्पतियों की भी 400 से ज्यादा प्रजातियां पाई गई हैं।
-एसएस रसाइली, वन संरक्षक और दल के टीम लीडर।
हिम तेंदुआ, काला भालू के साथ पक्षियों की 130 प्रजातियां
टीम ने बताया कि नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क में कभी पूरी तरह से खत्म हो चुकीं तमाम प्रजातियां भी इस बार दिखीं। करीब 12 साल बाद पार्क में गई टीम में वन विभाग के अधिकारी, कर्मचारी, भारतीय वन्य जीव संस्थान के वैज्ञानिकों से लेकर तमाम सदस्य शामिल रहे।
बताया कि वर्ष 1993 की तुलना में इस बार तमाम दुर्लभ विलुप्तप्राय पौधे भी नजर आए। वन्यजीवों की आबादी में भी वृद्धि हुई है।
वर्ष 1993 में पार्क में गई टीम की रिपोर्ट से तुलना करें तो इस बार हिम तेंदुआ, काला भालू, कस्तूरी मृग, भरल, हिमालयन थार, सेराव, रेड फॉक्स, बीजे के अलावा पक्षियों की करीब 130 प्रजातियां, जिसमें मोनाल, कोकलास, स्नो कोक आदि भी देखे गए। वनस्पतियों की करीब 400 प्रजातियां देखी र्गइं।