आत्मदाह के प्रयास के 14 साल पुराने मामले में आखिर शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी मुख्य न्यायिक न्यायाधीश (सीजेएम) की अदालत में पेश हो गए।
कई बार समन के बावजूद न आने पर अदालत ने कुछ समय पूर्व मंत्री के खिलाफ वारंट जारी कर दिए थे। कुछ समय पूर्व शासन ने जिलाधिकारी को यह मुकदमा वापस लेने के लिए पत्र भेजा था। अगली सुनवाई 22 जनवरी को होगी।
आत्मदाह के प्रयास का है मामला
बेरोजगारों को नौकरी की मांग पर बेरोजगार महासंघ के तत्कालीन सचिव (मौजूदा शिक्षा मंत्री मंत्री) प्रसाद नैथानी और अध्यक्ष कमल रतूड़ी ने आंदोलन शुरू किया था। 25 मार्च 2000 को दून कचहरी में शहीद स्मारक के पास दोनों ने खुद पर मिट्टी तेल छिड़ककर आत्मदाह का प्रयास किया था। इससे पूर्व उन्होंने अपर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा था।
जारी हुआ था गैर जमानती वारंट
प्रशासन की ओर से मामले में नैथानी पर मुकदमा दर्ज किया गया था। अदालत में पेश न होने पर गत वर्ष अदालत ने गैर जमानती वारंट जारी किए थे। शिक्षा मंत्री ने इसके खिलाफ सत्र न्यायालय में याचिका दाखिल की थी। सत्र न्यायालय ने वारंट पर रोक लगा दी थी।
कुछ दिन पूर्व प्रशासन ने नैथानी के खिलाफ दर्ज फौजदारी वाद वापस लेने की संस्तुति की थी। शासन की ओर से भी 19 अक्तूबर 2013 को वाद वापसी के लिए जिला प्रशासन को लिखा था। जिसके बाद प्रशासन ने यह संस्तुति की थी।