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जानते हैं देहरादून से बेहतर है नैनीताल

Sun, 19 Apr 2015 04:57 PM IST
सुधाकर भट्ट/ अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड में प्रति व्यक्ति आय एक लाख से अधिक है लेकिन बात जब जिलों की होती है तो काफी असमानता देखने को मिलती हैं।
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प्रदेश में ऐसे कई जिले हैं, जो जीवन स्तर और संतुष्टि स्तर पर बेहद पिछड़े हुए हैं। प्रदेश में जिला स्तर पर पहली बार तैयार किए गए मानव विकास सूचकांक (एचडीआई) में यह बात सामने आई है।

प्वाइंट पर आधारित इस सूचकांक में आदर्श स्थिति 1 मानी जाती है। एक से कम अंक खराब स्थिति को दर्शाता है। ऐसे में प्रदेश में जहां बेहतर स्थिति में नैनीताल नंबर एक पर है वहीं टिहरी की हालत सबसे ज्यादा खराब है। प्रदेश में आठ जिले ऐसे हैं जहां एचडीआई राज्य के औसत से कम है।
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सेवा के अधिकार आयोग के सचिव और विशेषज्ञ पंकज नैथानी की ओर से तैयार किए गए इस सूचकांक का प्रकाशन जर्नल ऑफ इनकम एंड वेल्थ में हो चुका है। पंकज नैथानी के मुताबिक इस सूचकांक को अभी आरंभिक स्तर पर तैयार किया जा सका है। सूचकांक के मुताबिक नैनीताल जिले की स्थिति सबसे बेहतर है।

शिक्षा की गुणवत्ता, प्रति व्यक्ति आय, स्वास्थ्य (शिशु मृत्यु दर) आदि के आधार पर तैयार किए गए इस सूचकांक में टिहरी सबसे निचले पायदान पर है। प्रति व्यक्ति आय और जिला स्तर पर सकल घरेलू उत्पाद के लिहाज से आगे रहने वाला हरिद्वार जिला भी इस सूचकांक में 12वें नंबर पर है।

हरिद्वार में शिशु मृत्यु दर (72) प्रदेश में सबसे अधिक है और जीवन प्रत्याशा (लाइफ एक्पेटेंसी) सबसे कम (65) है। प्रति व्यक्ति आय के हिसाब से हरिद्वार का नंबर तीसरा है। शिक्षा के मानक में नैनीताल का नंबर पहला है और प्रति व्यक्ति आय के हिसाब से चौथा।

जीवन प्रत्याशा में नैनीताल का नंबर पांचवां है। दूसरी ओर टिहरी का हाल हर मोरचे पर बुरा है। जीवन प्रत्याशा में टिहरी का नंबर 12वां है। हरिद्वार के बाद शिशु मृत्यु दर में टिहरी का नंबर है। शिक्षा के मानकों में टिहरी का नंबर 11वां है। जबकि प्रति व्यक्ति आय में टिहरी का नंबर नौ वां है।
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कुछ इस तरह है जिलों की स्थिति

जिला - एचडीआई
नैनीताल - 0.852
देहरादून - 0.798
चमोली - 0.764
पिथौरागढ़ - 0.714
अल्मोड़ा - 0.707
रुद्रप्रयाग - 0.618
पौड़ी - 0.608
चंपावत - 0.556
यूएसनगर - 0.519
बागेश्वर - 0.490
उत्तरकाशी - 0.353
हरिद्वार - 0.351
टिहरी - 0.304
उत्तराखंड - 0.631

क्या है मानव विकास सूचकांक
विश्व स्तर पर 1990 में स्वास्थ्य, शिक्षा और आय के लिहाज से मानव विकास सूचकांक का विकास किया गया था। इसमें आदर्श स्थिति 1 मानी जाती है, इस संख्या से जिस जिले का सूचकांक जितना नीचे होगा, उसकी स्थिति उतनी खराब मानी जाती है।

मानव विकास सूचकांक बताता है कि बेहतर जीवन स्तर की स्थिति क्या है और स्वस्थ जीवन, बेहतर शिक्षा और आय के लिए कितनी संभावना मौजूद है।

प्रदेश में पहली बार उत्तराखंड में
संयुक्त राष्ट्र और योजना आयोग की मदद से अब तक 20 राज्य, जिला स्तर पर एचडीआई प्रकाशित करते आए हैं। उत्तराखंड में पहली बार जिला स्तर पर एचडीआई तैयार किया जा रहा है।

देश में 19 वां नंबर
देश में 1996 में उत्तराखंड का एचडीआई रैंक 28वां था जो 2006 में सुधर कर 19वां हो गया था। 2006 में उत्तराखंड का एचडीआई स्कोर 0.652 था। इस समय यह स्कोर 0.631 है। 2006 में हिमाचल प्रदेश का रैंक 11वां और उत्तर प्रदेश का 16वां था।
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