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ओवरलोडिंग रोकते न होता धुमाकोट बस हादसा, नैनीताल हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी

Thu, 05 Jul 2018 09:19 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
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हाईकोर्ट ने अमर उजाला में धुमाकोट बस हादसे में प्रकाशित बस दुर्घटना के समाचार का उल्लेख करते हुए ओवरलोडिंग के मामले में विभिन्न दिशा निर्देश जारी किए हैं। 
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जस्टिस राजीव शर्मा ने परिवहन सचिव और परिवहन आयुक्त को छह जुलाई को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में तलब किया है। इनसे पूछा गया है कि पूर्व में ओवरलोडिंग रोकने पर दिए गए कोर्ट के आदेश का पालन क्यों नहीं किया गया।

कोर्ट ने ओवरलोडिंग तत्काल रोकने के निर्देश देते हुए प्रदेश की हर बार एसोसिएशन के सदस्यों से कहा है कि वे इस पर नजर रखें। कोर्ट ने संविदा पर तैनात चालकों और परिचालकों की सेवा नियमावली नियमित कर्मियों की भांति किए जाने के निर्देश दिए हैं। 
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कोर्ट ने बसों को केवल निर्धारित ढाबों पर ही रोकने, रोडवेज और निजी बस चालकों की आंखों की 15 दिन के भीतर जांच कराने, सीएमओ को रात्रि में चालकों के शराब पिए होने की जांच को विशेष दस्ते गठित करने के निर्देश दिए हैं।
 
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हाईकोर्ट ने सात सितंबर 2017 को प्रदेश में ओवरलोडिंग रोकने के लिए कई निर्देश जारी किए थे। हाईकोर्ट ने पूर्व आदेशों का पालन न करने पर परिवहन सचिव और परिवहन आयुक्त को 6 जुलाई को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। 

कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि परिवहन विभाग यदि चेता होता तो शायद इतनी बड़ी दुर्घटना न होती। वरिष्ठ न्यायमूर्ति राजीव शर्मा की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। अरुण कुमार ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। 

उन्होंने बताया कि पूर्व में कोर्ट ने वाहनों के औचक निरीक्षण के निर्देश दिए थे। सभी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों को निर्देशित किया था कि ओवरलोंडिग न हो पाए।

याची का कहना था कि इसके बावजूद इन आदेशों का पालन नहीं हुआ जिसके चलते एक जुलाई 2018 को धुमाकोट में बस संख्या यूके 12पीए 0159 ओवरलोडिंग के चलते दुर्घटनाग्रस्त हो गई।

कोर्ट ने इस हादसे का मुख्य कारण ओवरलोडिंग और मार्ग की खराब स्थिति को माना है। कोर्ट यह भी माना है कि 28 सीटर बस में 61 लोगों को सवारी कराना बड़ी दुर्घटना को न्योता देना है जो हुआ भी। ये परिवहन विभाग कमी है।
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