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नैनी झील सा शांत है नैनीताल का चुनाव

Wed, 23 Apr 2014 01:14 PM IST
नैनीताल से अनूप वाजपेयी
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दो दिनों से नैनीताल का मौसम कुछ खुला है, लेकिन चुनाव में कोई गर्मी नहीं आई है।
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सर्दी का असर चुनाव प्रचार में भी
मैदानों में चुनाव चरम पर है, लेकिन यहां न कोई पोस्टर और ना ही बैनर है। हल्की फुल्की चहलकदमी पार्टी कार्यालयों में तो जरूर है, लेकिन इस बार लंबी चली सर्दी का असर चुनाव प्रचार में भी दिख रहा है।

या यूं कहें कि नैना देवी मंदिर के ठीक नीचे हिलोरे लेती नैनी झील सा शांत है।

एक ओर देश भर में महामुकाबले के रणबांकुरे गर्म बयानबाजी और बहस कर चुनाव को गर्मी दे रहे हैं लेकिन यहां के करीब 36 हजार मतदाताओं के बीच अभी किसी भी प्रत्याशी ने चुनावी गर्मी नहीं घोली है।
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हां, नगर पालिका के पास लगा एक मात फैलेक्सी अबकी बार मोदी सरकार की बात बता रहा है; ऐसा नहीं यहां के लोग चुनाव को लेकर सजग नहीं हैं। उन्हें पता है कि मुकाबला किसके-किसके बीच है। उन्हें यह भी पता है कि चुनाव का एजेंडा क्या है।

चुनाव कार्यालय के नाम पर यहां पहले भाजपा और आप ने अपने अपने चुनाव कार्यालय खोले हैं, लेकिन वहां भी गिने-चुने कार्यकर्ता ही दिखते हैं।

यहां के स्थानीय निवासी बताते हैं कि यहां चुनावी टोलियां निकालने की परंपरा रही है, जिससे उम्मीदवार की ताकत का अंदाजा लगता है।

अभी तक नहीं आए प्रमुख पार्टियों के उम्मीदवार
नैनीताल सीट से फिलहाल दस उम्मीदवार मैदान में हैं लेकिन प्रमुख पार्टियों के उम्मीदवार भी अभी तक नहीं आए हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता गंगा प्रसाद कहते हैं कि शायद पहली बार ऐसा हुआ हो जब चुनाव इतने करीब हों और अभी तक उम्मीदवार नैनीताल से नदारद हो।

उनका कहना है कि नैनीताल के मतदाता हमेशा से जागरूक रहे हैं और बढा चढा का मतदान करते हैं।

इस संसदीय सीट से भाजपा उम्मीदवार भगत सिंह कोश्यारी से संबंधित प्रचार सामग्री नहीं दिखती, लेकिन नैनीता आने वाले रास्तों में कहीं कहीं उनके पोस्टर जरूर दिखते हैं।
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भाजपा नेता संतोष शाह का कहना है कि हाल ही कोश्यारी नैनीताल आए थे। वह भी मानते हैं कि यहां चुनाव ठंडा है; ऐसा सिर्फ भाजपा में नहीं बल्कि सभी दलों में है।
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