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शहर बड़ा लेकिन निगम की कमाई छोटी

Thu, 11 Feb 2016 04:38 PM IST
गौरव मिश्रा/ अमर उजाला, देहरादून
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देहरादून नगर निगम का वित्तीय आकार 146 करोड़ रुपये से ज्यादा है। यह राशि पुनरीक्षित बजट की है।
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शहर की स्थिति को देखते हुए यह वित्तीय आकार बहुत छोटा माना जाएगा। जानकारों की मानें तो निगम की वित्तीय हैसियत कम से कम 500 करोड़ की होनी चाहिए। जानकार यह भी कहते हैं कि शहर के हिसाब से निगम की कमाई नहीं है।

जानेमाने टैक्स एक्सपर्ट पार्थसार्थी शोम स्थानीय निकायों को वित्तीय तौर पर शक्तिशाली बनाने के पक्षधर रहे हैं। इस बाबत उन्होंने गहन शोध किया है। उनकी संस्तुतियों को मानें तो निगम क्षेत्र में सेवा क्षेत्र की अर्थव्यवस्था (सर्विस इकॉनामी) बहुत बड़ी है। इसका फायदा सर्विस टैक्स विभाग को मिल रहा है।
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शोम की संस्तुतियों को स्वीकारें तो सेवा क्षेत्र की आर्थिकी का लाभ निगम को मिलना चाहिए। अगर ऐसा हुआ तो निगम को कम से कम 250 से 300 करोड़ रुपये की आय हो जाएगी। यह कोई उपकार नहीं, बल्कि विकेंद्रित कर लाभ वितरण के न्यायपूर्ण सिद्धांत का तकाजा है।

इसी तरह दून में टरसरी (कारोबार व सेवा की मिली जुली आर्थिकी) सेक्टर भी काफी बड़ा है। इसलिए व्यापार कर या वाणिज्य कर का एक मुनासिब हिस्सा नगर निगम को मिलना चाहिए। यह राशि कम से कम 100 करोड़ रुपये की तो होनी ही चाहिए। एमसीडी के भूतपूर्व वरिष्ठ अधिकारी वीरेंदर सिंह कहते हैं कि एमडीडीए का सारा काम निगम को मिल जाना चाहिए।

इससे निगम की आय बढ़ेगी। इस समय निगम की निधि बहुत कम है। प्रतिभूति की तो हैसियत ही नहीं है। अमीर शहर में गरीब निगम का मतलब है गलत वित्तीय शासन व्यवस्था। स्टैंप शुल्क व व्यावसायिक शुल्क पर रोक लगाना अतार्किक व न्यायपूर्ण कर व्यवस्था सिद्धांत के विपरीत है। वह कहते हैं कि निगम को पेशेवर और कामर्शियल एप्रोच अपनानी होगी। वित्तीय स्वावलंबन के बिना निगम सेवाओं की डिलीवरी नहीं कर सकता।

दून की बरबादी के लिए मेयर जिम्मेदार
मेयर विनोद चमोली और कैबिनेट मंत्री दिनेश अग्रवाल में चल रहा वाक युद्ध बढ़ गया है। कैबिनेट मंत्री दिनेश अग्रवाल ने साफ कहा कि मेयर ने अपनी असफलताओं को छिपाने के लिए सरकार पर दोष मढ़ने की रणनीति अपनाते रहे हैं। जबकि शहर की बदहाली के लिए सबसे अधिक मेयर ही जिम्मेदार हैं।

उन्होंने कहा कि अमृत योजना पर जो बैठक उन्होंने बुलाई थी वह योजना की वस्तुस्थिति जानने के लिए थी। अमृत योजना को टाले जाने से चिंतित होना स्वाभाविक है। यह योजना प्रदेश सरकार के प्रयासों से आई है। अग्रवाल ने कहा है कि बैठक में किसी योजना को घटाने या बढ़ाने पर चरचा नहीं हुई।

सिर्फ विकास की एकरूपता पर बल दिया गया। अमृत योजना के प्रस्ताव नगर निगम द्वारा प्रेषित किए गए थे। उन्होंने कहा कि एक कैबिनेट मंत्री होने के नाते प्रदेश की योजनाओं की जानकारी लेना व उचित सलाह देना उनकी जिम्मेदारी है। मेयर को समझ लेना होगा स्मार्ट सिटी का प्रस्ताव नगर निगम बोर्ड द्वारा परित किया गया था।

अग्रवाल ने कहा कि वह झूठा श्रेय लेने के लिए होर्डिंग नहीं लगवाते। वह काम करते हैं इसीलिए धर्मपुर विधानसभा सीट विकास का पर्याय है। यह उनका प्रयास था कि 2006 में एडीबी से यहां काम कराने का अनुबंध राज्य सरकार ने किया था। उनकी ही कोशिश से दून के दोनों बड़े सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट उनके निर्वाचन क्षेत्र में स्थापित हुए हैं।

अग्रवाल ने कहा कि मेयर को चाहिए कि वह सभी पार्षदों से सौहार्दपूर्ण संवाद स्थापित करें। मेयर की नाकामी के कारण शहर गंदा हो गया है। यह देश के सबसे गंदे शहरों में शामिल है। मंत्री ने कहा कि उनकी कोशिशों की वजह से दून को खेलों में अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने जा रही है।

मेयर विकास के दुश्मन
राजपुर विधायक व संसदीय सचिव राजकुमार ने कहा है कि विकास कार्यों में मेयर विनोद चमोली बाधाएं खड़ी कर रहे हैं। दो साल से मेयर विकास के दुश्मन बने हुए हैं। मेयर की वजह से प्रभात सिनेमा हॉल से भूसा स्टोर सहारनपुर रोड तक नाले को ढकने के काम की एनओसी नौ अक्तूबर 2015 से निगम में लंबित है। निगम ने घंटाघर के नवीनीकरण व सुंदरीकरण के संबंध में भी एमडीडीए को एनओसी नहीं दी।

राजकुमार ने कहा कि उन्होंने विधायक निधि से शहर की सफाई व्यवस्था के लिए 19 टाटा ऐस और पांच ई-रिक्शे प्रदान किए। लेकिन निगम की सफाई व्यवस्था बदहाल है। मेयर के इशारे पर निगम प्रशासन विधायक निधि से होने वाले ट्यूबवेल, सामुदायिक भवन निर्माण, आंगनबाड़ी केंद्र निर्माण, सड़क निर्माण के कार्यों पर अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) नहीं देता है।
राजकुमार ने कहा कि मेयर अनर्गल बयान देने में महारत हासिल कर चुके हैं। मेयर का यह कहना कि मलिन बस्ती सुधार समिति के गठन के बाद मलिन बस्तियों में टैक्स लगना बंद हो गया है।
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जबकि सरकार की तरफ से किसी भी नगर निकाय को इस तरह के आदेश नहीं दिए गए हैं। विधायक ने कहा कि हमारे स्तर पर टैक्स लगाए जाने व नियमितीकरण का दबाव सरकार पर बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार की लोकप्रियता से मेयर भयभीत हैं इसलिए झूठ का सहारा ले रहे हैं।
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