नाग पंचमी के मौके पर शुक्रवार को शहर के शिवालयों में नाग-नागिन की पूजा की जाएगी।
इस मौके पर मंदिरों में चांदी के नाग-नागिन चढ़ाए जाएंगे। सांपों की पूजा के लिए शिवालयों में गुरुवार को विशेष तैयारी की गई।
श्रावण शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नागों की पूजा की जाती है। इस दिन शिव योग, हस्त नक्षत्र और बालव करण होना अच्छा माना जा रहा है। ज्योतिषियों के अनुसार इस मौके पर बारह प्रकार के काल सर्प दोषों से मुक्ति पाई जा सकती है।
ये है मान्यता
पौराणिक मान्यता के अनुसार एक बार ब्रह्माजी ने शेषनाग को पृथ्वी का भार उठाने भेजा था। पृथ्वी को धारण करने का अर्थ है खेती और फसलों की रक्षा, इसलिए वास्तु पुरुष में रूप में भी सर्प को पूजा जाता है।
शेषनाग का पूजन नागपंचमी के दिन ही किया जाता है। डॉ. आचार्य सुशांत राज ने बताया कि इस दिन बारह प्रकार के काल-सर्प दोष से मुक्ति पाई जा सकती है।
आचार्य भरत राम तिवारी ने बताया कि इस दिन मंदिरों में पूजन के साथ ही घर के दोनों ओर दीवारों पर गोबर की सर्पाकृति बनाई जाती है।
होगा अभिषेक, पूजन
आज शहर के सभी शिवालयों में विशेष पूजन होगा। गढ़ी डाकरा स्थित नागेश्वर मंदिर के महंत विश्वनाथ योगी ने बताया कि अभिषेक की बुकिंग काफी पहले से ही होने लगी थी।
इस दिन के लिए विशेष तौर पर बाहर से पंडित बुलाए गए हैं। महंत कृष्णा गिरी ने बताया कि श्रद्धालु इस मौके पर मंदिर पहुंचकर भोले बाबा का अभिषेक करते हैं।
उन्हें बेल पत्र के साथ ही चांदी के नाग-नागिन चढ़ाते हैं। श्री पृथ्वीनाथ मंदिर के संजय गर्ग ने बताया कि धातु से बने नाग-नागिन के जोड़े चढ़ाने के साथ ही मंदिर में पूजा करने से लोगों को काल-सर्प दोष से मुक्ति मिलती है।