यहां उसने 27 दिसंबर को कमरा एक महीने के लिए लिया। इस बीच तानिया को पता चल गया कि शुभम ने पिता प्रभुदयाल की हत्या कर दी है। तानिया घबराई और उसने यह बात शुभम को बताई। तो शुभम ने राजदार तानिया को भी रास्ते से हटाने का प्लान बनाया। वह 13 जनवरी की शाम तानिया को अपने स्कूटर से लेकर एयरपोर्ट तक आया। यहां उसने पहले से ही अपनी कार पार्क की हुई थी। वह कार से बड़ासी तक आया और यहां तानिया के सिर में गोली मारकर उसे पुल के नीचे फेंक दिया। इसके बाद वह फिर से होटल आराधना में आ गया। यहां से अगले दिन वह सामान लेकर मसूरी चला गया।
कार पर लगाई फर्जी नंबर प्लेट
आरोपी ने पुलिस को चकमा देने के लिए कार पर फर्जी नंबर प्लेट लगाई थी। दरअसल, जिस जगह तानिया घायल हालत में मिली वहां के रास्ते पर पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज चेक किए। पता चला कि यहां पर एक दिल्ली नंबर की कार आई और फिर थोड़ी देर बाद वापस आई। पुलिस ने नंबर से पता किया तो उसका संबंध शुभम से नहीं मिला। लेकिन, कार शुभम की थी इसकी तस्दीक तानिया की बहन काव्या ने कर दी। इस पर उसका असली नंबर गुड़गांव हरियाणा का पाया गया। उसने ओएलएक्स पर देखकर अपनी कार से मिलती जुलती कार का नंबर बनवाया था।
पत्नी को नहीं पता था जौलीग्रांट पर खड़ी है कार
शुभम अपनी पत्नी के साथ छिद्दरवाला में रह रहा था। तब उसके पास स्कूटर ही था। जब वह मुनिकीरेती गया वहां भी उसके पास स्कूटर ही था। होटल में आना जाना भी वह स्कूटर से ही करता था। पत्नी को भी इस बात का नहीं पता चला कि उसने कार को जौलीग्रांट पार्किंग में खड़ा किया है। पुलिस जब इस कार तक पहुंची तो उसमे कारतूस के खोखे बरामद हुए। पुलिस ने सभी खोखों को एफएसएल जांच के लिए भेज दिया है।