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योग करें और ओम की जगह मुस्लिम बोलें अल्लाह: मुस्लिम उलेमा

Tue, 21 Jun 2016 12:26 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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muslim ulema - फोटो : amar ujala
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आज विश्व योग दिवस है। योग को मुस्लिम उलेमा ने धर्म से न जोड़ने की बात कही है। उनका कहना है कि योग से स्वास्थ्य लाभ मिलता है। सेहत के लिए कोई भी योग कर सकता है। ओम के स्थान पर अल्लाह हू का उच्चारण किया जा सकता है। 
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नायब शहर काजी डा. अशरफ हुसैन कादरी ने बताया कि इस्लाम में सूफिया ए इकराम ने कई तरह यौगिक क्रियाओं को अपनाया है। वे भी अपनी क्रिया में सांस अंदर लेते वक्त अल्लाह और सांस छोड़ते समय हू कहते हैं। यह भी एक योग क्रिया है।

उन्होंने बताया कि कई उलेमा ने अपनी किताबों में योग को कसरत के रूप में करने की सलाह दी है। कहा कि ओम की जगह मुस्लिम अल्लाह हू का उच्चारण कर सकते हैं।
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साथ ही उन्होंने लोगों से योग को धर्म विशेष से न जोड़ने की अपील भी की। बताया कि हदीस पाक में भी स्वस्थ रहने के लिए लाठी चलाना, तैराकी करना, घुड़सवारी करना और कुश्ती की सलाह दी गई है।
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सेहत का ख्याल इस्लाम में अच्छा समझा जाता है

राष्ट्रीय योग ओलंपियाड - फोटो : file photo
मुफ्ती-ए-आजम सलीम अहमद कहते हैं कि पैगंबर-ए-इस्लाम की हदीस है कि ‘ताकतवर मोमिन कमजोर से बेहतर है।’ इससे मालूम होता है कि सेहत का ख्याल इस्लाम में अच्छा समझा जाता है।

कसरत या वर्जिश करने में इस्लाम में कोई पाबंदी नहीं। मौजूदा योग भी एक वर्जिश है। ऐसे में यह इस्लाम धर्म के खिलाफ नहीं है। वर्जिश करने में कोई हर्ज नहीं है। ओम कहना न जरूरी है और न ही हुकूमत की ओर से इस संबंध में कोई पाबंदी ही है। ऐसे में योग के विरोध की कोई वजह नहीं बनती है।

सूफियों का कहना है कि अल्लाह और ओम ही ऐसे शब्द हैं जिनका विश्व की दूसरी किसी भाषा में विकल्प नहीं है। दोनों पुरातन काल से चले आ रहे हैं।

इस्लाम के बहुत पहले से अरब में अल्लाह शब्द का प्रयोग हो रहा है। सूफियों ने माना है कि ये दो शब्द ही ऐसे हैं जिनके उच्चारण के अभ्यास से कुंडलिनी जागृत होती है।

Published By : Nirmala Suyal
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