देहरादून के नकरौंदा में बदमाशों ने मां-बाप की पिटाई का विरोध करने वाले इकलौते जवान बेटे अंकित थपलियाल (23) की गोली मारकर हत्या कर दी।
लेकिन लूट का विरोध करने पर अंकित थपलियाल को गोली मारने वाले बदमाश जाते समय परिजनों को इलाज की नसीहत भी दे गए थे। बाथरुम में लहूलुहान करने के बाद बदमाशों को अंकित की गंभीर स्थिति का अनुमान हो गया था।
यही वजह थी कि घर से निकलते हुए एक बदमाश ने कहा था कि उनके बेटे की हालत सीरियस है, उसे उपचार के लिए अस्पताल ले जाए।
सात फुट की दीवार भी नहीं आई काम
सहायक कृषि अधिकारी सुरेंद्र थपलियाल ने सुरक्षा के लिहाज से कुछ दिन पहले ही घर की चाहरदीवारी को सात फीट ऊंचा किया था। साथ ही दीवार के ऊपर नुकीली बाड़ भी लगाई थी। लेकिन, यह दीवार बदमाशों की राह नहीं रोक पाई।
बदमाश बड़े आराम से इस दीवार को फांदकर घर में दाखिल हुए और फरार भी। मूल रूप से कोटद्वार निवासी सुरेंद्र थपलियाल ने पांच साल पहले ही नकरौंदा की विवेक विहार कॉलोनी के बाहरी हिस्से में घर बनाया था।
दस दिन पहले ट्रांसफर होकर आए थे दून
सुरेंद्र दस दिन पहले ही ऋषिकेश से स्थानांतरित होकर दून आए थे। वैसे तो कॉलोनी में काफी आबादी है, लेकिन सुरेंद्र थपलियाल के घर के आसपास काफी जमीन खाली पड़ी है। नाले की तरफ खाली पड़ी जमीन से लगा थपलियाल का अंतिम मकान है, जहां से लेकर हरिद्वार रोड तक जंगल है।
उनके घर के तरफ मकान है, लेकिन सामने खाली प्लाट है। आवास की बाहरी दीवार पहले चार फुट के करीब थी। पड़ोसियों की सलाह पर उन्होंने इसकी ऊंचाई बढ़ाई थी। जंगल की तरफ से आए बदमाश घर के बाहर एक कोने में उगी झाड़ियों का सहारा लेकर दीवार पर चढ़े थे।
दीवार पर बदमाशों के पैरों के निशान भी मौजूद हैं। फरार होने के लिए बदमाशों ने एक कुर्सी का सहारा लिया। इस कुर्सी पर उखाड़ी गई खिड़की की ग्रिल को रखने के बाद बदमाश दीवार फांदकर फरार हो गए।
अपना दूर, पड़ोसी थाना पास
रायपुर पुलिस को फुर्सत नहीं, डोईवाला थाने को क्षेत्र से मतलब नहीं
नकरौंदा में हुए खून-खराबे के बाद इस इलाके की सुरक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में है। यह इलाका वैसे तो रायपुर थाने के क्षेत्र में है, लेकिन क्षेत्र के इस अंतिम छोर की सुरक्षा को लेकर थाना पुलिस बेपरवाह है। जबकि, पास ही डोईवाला थाने की हर्रावाला चौकी है, लेकिन इस क्षेत्र से कोई मतलब नहीं।
हंगामे के दौरान लोगों ने यह मुद्दा उठाया तो पुलिस अधिकारियों के पास कोई जवाब नहीं था। यही कारण रहा कि आननफानन में अस्थाई चौकी खोल दी गई। रायपुर थाने से नकरौंदा के इस इलाके की दूरी करीब 13 किलोमीटर है। जबकि, घटनास्थल से सिर्फ पांच सौ कदम की दूरी पर हर्रावाला चौकी है।
जिला पंचायत सदस्य हेमा पुरोहित का कहना था कि हर बार चौकी का प्रस्ताव ग्राम समाज की भूमि न मिलने की वजह से अटक जाता है। इसलिए इलाके को डोईवाला थाना क्षेत्र में शामिल कर दिया जाए। प्रधान शबनम थापा कहती हैं कि बाहरी तत्वों की बढ़ती घुसपैठ के मद्दनेजर यहां चौकी स्थापित किया जाना जरूरी है।
उधर, एडीजी राम सिंह मीणा का कहना है कि इस इलाके को रायपुर थाने से निकालकर डोईवाला में शामिल किए जाने की प्रक्रिया लंबी है। इस लिहाज से फिलहाल अस्थाई चौकी खोली जा रही है।
राजधानी में एक के बाद एक हो रही डकैती-लूट की घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर दिया है। 24 अगस्त को मोथरोवाला में कंप्यूटर कारोबारी राजीव चौहान के घर डकैती के बाद 25 अगस्त को इस क्षेत्र में पूजा बडोला के घर लूटपाट की गई थी।
मंगलवार को भी दो बदमाशों ने कारगी क्षेत्र में एक महिला को बंधक बनाकर 40 हजार रुपए और जेवरात लूट लिए थे। पुलिस ने बुधवार को लूट की दो घटनाओं का खुलासा किया, लेकिन नकरौंदा में हुई वारदात ने इस कामयाबी का जोश ठंडा कर दिया।
परवल गांव में दो घरों और मोथरोवाला में कंप्यूटर कारोबारी राजीव चौहान के परिवार को बंधक बनाकर लूटपाट के मामलों में पुलिस ने दो बदमाशों को गिरफ्तार किया है, जबकि दो फरार बताए गए हैं। पहले मीडिया के सामने इन घटनाओं का खुलासा करने की तैयारी थी।
लेकिन नकरौंदा में वारदात के बाद बदमाशों की गिरफ्तारी की जानकारी व्हाट्स ऐप से मीडिया को दी गई। पुलिस का दावा है कि परवल और मोथरोवाला लूट में एक ही गैंग शामिल था।
गैंग के सलमान और शुभम पंवार निवासी गोरखपुर पटेलनगर को गिरफ्तार कर उनकी निशानदेही पर सोने की एक चेन, तीन अंगूठी, दो जोड़ी झुमके, मंगलसूत्र आदि बरामद हुआ है। बाकी सामान फरार चल रहे शामली के इकराम और पटेलनगर के वसीम के पास बताया गया है।