देहरादून। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा, कुछ चितकबरे चहेतों ने मेरे सक्रिय राजनीति से संन्यास दिलाने की सुपारी ले रखी है। 60 से 62 वर्षों के संघर्षपूर्ण राजनीतिक जीवन से संन्यास छुपाकर नहीं लूंगा, जिस दिन संन्यास करूंगा, पूरे गाजे-बाजे के साथ करूंगा।
हरीश रावत ने कहा, मैं संन्यास को जीवन की उच्चतम स्थिति मानता हूं और मैं भविष्य में उस अवस्था में जाने का अभिलाषी भी हूूं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस दिन पार्टी नेतृत्व व प्रदेश के नेता मुझसे सक्रिय राजनीति से संन्यास की अपेक्षा करेंगे, मैं उन्हें ससम्मान धन्यवाद देते हुए उस सलाह को सबके साथ साझा करूंगा। कुछ दूसरी पार्टी के सक्रिय और अर्द्धसक्रिय शुभचिंतकों ने भी मुझे राजनीति से संन्यास लेने की सलाह दी है। मेरे ये चितकबरे चहेते मुझे संन्यास भी दिलवाना चाहते हैं। साथ ही कांग्रेस की चुनावी हार की गठरी भी मेरे सर पर रखना चाहते हैं। यह सत्य है कि मैं जितने चुनाव जीता हूं, उससे अधिक चुनाव हारा हूं। मगर यह भी सत्यता है कि हर हार के बाद मैं जीत के नए संकल्प के साथ खड़ा और आगे बड़ा हूं। हार और जीत जनता-जनार्दन के हाथ में है। लेकिन प्रारब्ध के लिखे को बदलने की कोशिश, संघर्ष और प्रार्थना करना ही मेरी खासियत है।