तीनों बच्चों ने बढ़ाया मां का मान
शमा ने जितना संघर्ष किया उनके बच्चों ने भी उसे समझा ओर जीवन की बेहतर राह चुनी। आज उनका बड़ा बेटा फिरोज़ पाशा (45) मर्चेंट नेवी में कैप्टन है। दूसरा बेटा एजाज़ परवेज़ खान(43) देहरादून रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन(डीआरडीओ) में साइंटिस्ट(एस) है। वहीं बेटी यास्मीन(40)उत्तर प्रदेश में स्टेट स्कूल में साइंस की प्रवक्ता हैं।
लेखन और मंचन से भी बनाई पहचान
शमा खान एक शिक्षिका होने के साथ ही बेहतरीन लेखिका भी हैं। उन्होंने केंद्रीय विद्यालय में नौकरी के दौरान ही लेखन की शुरुआत की और कई कहानियां, कविताएं और गज़लें लिखी हैं। अब तक उनकी 10 किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं और 200 से ज्यादा कहानियां अलग-अलग पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं। आकाशवाणी में भी उनकी कहानियां लगातार प्रसारित होती रही हैं। जेल में बेवजह सजा काट रहे कैदियों पर लिखी उनकी किताब काफी चर्चित रही। वह ड्रामा आर्टिस्ट भी रहीं। उन्होंने रामलीला में भी काम किया।
मां ने साथ दिया तो मिली हिम्मत
शमा ने बताया कि जब उनके पति का साथ छूटा तो लोगों ने कहा दूसरा निकाह कर लो, लेकिन जब उन्होंने बच्चों को ही अपनी दुनिया बनाने की ठानी तो मां ने साथ दिया। मां उनका सहारा बनी और पढ़ाई व नौकरी के दौरान उन्होंने बच्चों को संभालने में उनकी काफी मदद की।