जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने सास-ननद को हत्या के प्रयास का दोषी पाते हुए पांच-पांच साल की कैद और तीन-तीन हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
ननद के अदालत में हाजिर नहीं होने पर उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी किया गया है, जबकि पीड़िता के पति को दहेज के लिए प्रताड़ित करने का दोषी पाते हुए दो साल की सजा सुनाई गई है। दहेज उत्पीड़न मामले में सास को भी दोषी पाया गया है।
सहायक शासकीय अधिवक्ता प्रेम बल्लभ पंत ने बताया कि दो नवंबर 2011 को सीता देवी की शादी गोपाल सिंह पुत्र कुंदन सिंह निवासी ग्वींठ के साथ हुई थी। शादी के बाद से ही सीता की सास बचूली देवी, ननद बीरा देवी और पति गोपाल सिंह उसे दहेज के लिए प्रताड़ित करने लगे थे।
दो फरवरी 2013 को पीड़िता की सास बचूली देवी और ननद बीरा देवी ने सीता के ऊपर मिट्टी तेल छिड़ककर उसे आग लगा दी। पीड़िता को स्वास्थ्य केंद्र चाकीसैंण में भर्ती करवाया गया, जहां से उसकी गंभीर हालत को देखते उसे बेस चिकित्सालय श्रीनगर भेजा गया। उपचार के बाद वह स्वस्थ हो गई थी।
पीड़िता के भाई रतन सिंह निवासी खंड मल्ला ने मामले में तीन फरवरी 2013 को राजस्व पुलिस चौकी ढ़ाईज्यूली में आरोपियों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। जिला एवं सत्र न्यायाधीश कंवर सेन की अदालत ने पीड़िता की सास, ननद को हत्या के प्रयास का दोषी पाया और उन्हें पांच-पांच साल की सजा और तीन-तीन हजार के अर्थदंड की सजा सुनाई।
ननद के कोर्ट में हाजिर नहीं होने पर अदालत ने बीरा देवी के खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी किया है, जबकि पीड़िता के पति गोपाल सिंह और सास को दहेज के लिए प्रताड़ित करने का दोषी पाते हुए दो-दो साल की सजा सुनाई है। मामले में विवेचना राजस्व उपनिरीक्षक बुद्धि बल्लभ बमराड़ा ने की।