हज के पाक सफर को आवेदन करने वाले ज्यादातर मोमीनों की ख्वाहिश इस बार अधूरी रह सकती है। कोटे के बराबर सीट पहले से ही आरक्षित है। जबकि इस बार आवेदन करने वालों की तादाद कोटे से ढाई गुना ज्यादा है। हालांकि हज कमेटी के चेयरमैन हाजी राव शेर मोहम्मद ने इस मामले को राष्ट्रीय हज कमेटी में उठाने की बात कही है।
सोमवार को हज यात्रा को आवेदन करने की आखिरी तारीख थी। प्रदेश से 4850 लोगों ने पाक सफर पर जाने को आवेदन किया। राष्ट्रीय हज कमेटी ने प्रदेश के लिए 1407 सीटों (मुस्लिम आबादी की एक हजार जनसंख्या पर एक सीट) का कोटा तय किया है।
इसमें चार साल से आवेदन करने वाले, सत्तर साल से ज्यादा की उम्र वाले 1400 लोग शामिल हैं, जिनका पहले से ही आरक्षण तय है। पहले इन्हीं लोगों का नाम कुर्रा में शामिल किया जाएगा। उसके बाद अन्य लोगों का नंबर आएगा। आंकड़ों के लिहाज से देखा जाए तो बहुत कम लोगों की ही हुजूर का शहर देख पाने की मुराद पूरी हो पाएगी।
इस बार आए रिकार्ड आवेदन
इस साल हज पर जाने के लिए आवेदन करने वालों की संख्या में इजाफा हुआ है। हज कमेटी की माने तो 4850 लोगों ने आवेदन किया है, जोकि अब तक का रेकार्ड है। वर्ष 2014 में 3500 और 2015 में 4634 लोगों ने आवेदन किया था।
नहीं बढ़ेगी आवेदन की तारीख
हज यात्रा पर जाने के लिए आवेदन की अंतिम तारीख 15 फरवरी थी। बीएसएनएल का नेटवर्क वीक होने के कारण कई आवेदकों के फार्म कमेटी की साइट पर अपलोड़ नहीं हो पाए थे। अब उन्हें कवर नंबर नहीं मिलने की चिंता सताने लगी है।
चेयमैन हाजी राव शेर मोहम्मद का कहना है कि जिनकी आवेदन फीस जमा है, उनको कवर नंबर दिलवाने को केंद्रीय हज कमेटी से बात की जा रही है। आवेदन की तिथि बढ़ने की किसी गुंजाइश से उन्होंने इंकार कर दिया।
पूर्व में प्रदेश के लिए 850 सीटों का कोटा तय था। इस साल राष्ट्रीय हज कमेटी ने कोटा बढ़ाकर 1407 किया है। लेकिन इस साल 4850 आवेदन आने और 1400 लोगों का पहले से ही कोटा रिजर्व होने से ज्यादा लोगों को हज यात्रा से महरूम होना पड़ सकता है। इस मुद्दे को एक मार्च को होने वाली राष्ट्रीय कमेटी की बैठक में उठाएंगे। रिजर्व सीटों के लिए अलग से कोटा देने की मांग की जाएगी।
हाजी राव शेर मोहम्मद, चेयरमैन, उत्तराखंड राज्य हज कमेटी
राव शेर मोहम्मद दोबारा बने हज कमेटी के चेयरमैन
देहरादून में हुई बैठक में हाजी राव शेर मोहम्मद को सर्वसम्मति से उत्तराखंड राज्य हज कमेटी का पुन: चेयरमैन चुन लिया गया है। जबकि सदस्यों में मोहम्मद अली को छोड़कर शेष सभी नए चेहरों का जगह दी गई है।
उत्तराखंड राज्य हज कमेटी में तीन वर्ष का कार्यकाल होता है। चेयरमैन और 10 सदस्यों के अलावा मुस्लिम विधायक कमेटी में पदेन सदस्य के तौर पर शामिल होते हैं। पिछली कमेटी का कार्यकाल 21 नवंबर 2015 को पूरा हो गया था। लेकिन आचार संहिता समेत कई कारणों से कार्यकाल बढ़ा दिया गया था।
अब कमेटी नए सिरे से गठित करने के लिए देहरादून में बैठक बुलाई गई। इसमें हज कमेटी चेयरमैन की बागडोर एक बार फिर राव शेर मोहम्मद को दी गई। पिछली कमेटी में सदस्य रहे देहरादून क्लेमनटाउन निवासी मोहम्मद अली को इस बार भी सदस्य बनाया गया है।
इनके अलावा चमोली के अयाजुद्दीन सिद्दीकी, हल्द्वानी के अनवार अहमद, नैनीताल के रईस अहमद, लोहाघाट के मोहम्मद फारूक, देहरादून के गुलिस्ता अंसारी, बहादरपुर खादर हरिद्वार के रईस मंसूरी, सुल्तानपुर हरिद्वार के सनव्वर अली, ऊधमसिंह नगर के अब्दुल हसन, मंगलौर हरिद्वार के सैयद मेराज मेहंदी को सदस्य बनाया गया है। पिरान कलियर विधायक फुरकान अहमद, मंगलौर विधायक सरवत करीम अंसारी पदेन सदस्य के तौर पर कमेटी में शामिल रहेंगे।