फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Uttarakhand News: हिमालयी राज्यों में सबसे अधिक जंगल उत्तराखंड में विकास की भेंट चढ़ा, रिपोर्ट से खुलासा

Thu, 10 Aug 2023 11:09 AM IST
रेनू सकलानी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून

सार

पड़ोसी राज्य हिमाचल में 6696 हेक्टेयर वन भूमि दूसरे उपयोग के लिए इस्तेमाल हुई। केंद्रीय पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने लोकसभा में एक प्रश्न के जवाब में ये आंकड़े रखे।
विज्ञापन
उत्तराखंड - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पिछले डेढ़ दशक के दौरान हिमालयी राज्यों में सबसे अधिक जंगल उत्तराखंड राज्य में गैर वानिकी उपयोग यानी विकास की भेंट चढ़े। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में 15 वर्षों में 14141 हेक्टेयर वन भूमि अन्य उपयोग के लिए ट्रांसफर की गई।

विज्ञापन


अरुणाचल प्रदेश को छोड़कर बाकी कोई हिमालयी राज्य उत्तराखंड के आसपास नहीं है। पड़ोसी राज्य हिमाचल में 6696 हेक्टेयर वन भूमि दूसरे उपयोग के लिए इस्तेमाल हुई। केंद्रीय पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने लोकसभा में एक प्रश्न के जवाब में ये आंकड़े रखे।

आंकड़ों के मुताबिक, वन भूमि डाइवर्जन मामले में उत्तराखंड देश के टॉप 10 राज्यों में शामिल है। राज्य में औसतन प्रत्येक वर्ष 943 हेक्टेयर भूमि दी जा रही है। वर्ष 2008-09 से लेकर वर्ष 2022-23 के दौरान सभी राज्यों में 305945.38 हेक्टेयर भूमि वन संरक्षण अधिनियम 1980 के तहत गैर वानिकी उपयोग के लिए लाई गई।

विज्ञापन
विज्ञापन

हिमालयी राज्यों में अन्य उपयोग में लाई वन भूमि का ब्योरा

राज्य             दी गई वन भूमि(हे.)

उत्तराखंड             14141

हिमाचल             6696

जम्मू और कश्मीर 423

अरुणाचल प्रदेश 12778

असम             6166

मेघालय             421

मणिपुर             3758

मिजोरम             926

त्रिपुरा                         1860

ये भी पढ़ें...Uttarakhand Weather: ऋषिकेश लक्ष्मण झूला के पास गिरी दीवार, मलबे में दबे दो साधु, एक को बचाया, दूसरे की मौत

इन कार्यों के लिए दी गई जंगल की भूमि

सड़क, रेलवे, पुनर्वास, शिक्षा, उद्योग, सिंचाई, ऑप्टिकल फाइबर, नहर, पेयजल, पाइपलाइन, उत्खनन, जल, ऊर्जा, सौर ऊर्जा

उत्तराखंड राज्य की संवेदनशीलता को देखते हुए ये आंकड़े चिंता में डालने वाले हैं। हर साल राज्य आपदाओं और जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणामों का सामना कर रहा है। नीति नियंताओं को गंभीरता से पर्यावरण संतुलन के बारे में सोचना होगा। - अनूप नौटियाल, सामाजिक कार्यकर्ता।

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें