केंद्र के नेशनल सोशल असिसटेंस प्रोग्राम (एनएसएपी) के तहत पेंशन ले रहे प्रदेश के 74742 पेंशनरों के आधार अवैध पाए गए हैं। एनएसएपी की वेबसाइट पर अपलोड किए गए कुल डेटा के सापेक्ष ये आंकड़ा करीब 57 फीसदी है। 36 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों की सूची में अवैध पेंशनरों की ये तादाद सबसे अधिक है।
केंद्र सरकार ने पेंशन खातों से लिंक आधार नंबर के वेरिफिकेशन से यह फर्जीवाड़ा पकड़ा है। अवैध पेंशनरों की दूसरी सबसे बड़ी संख्या बिहार की है, जहां 48842 पेंशनरों के आधार अवैध पाए गए हैं। इस खुलासे के बाद केंद्र सरकार से अवैध पाए गए पेंशनरों का जिलावार ब्यौरा देने को कहा जा रहा है ताकि उन कारणों की पड़ताल की जा सके, जिसके चलते आधार को अवैध करार दिया गया। फिलहाल केंद्र की ओर से राज्य सरकार को सूची दे दी गई है।
एनएसएपी के तहत दो लाख 65 हजार पेंशनरों को विभिन्न योजनाओं में पेंशन दी जा रही है। इनमें से अब तक एक लाख 30 हजार 382 पेंशनरों के आधार एनएसएपी की वेबसाइट पर अपलोड किए जा चुके हैं। इनमें से 57 फीसदी आधार अवैध हैं। यूनिक आइडेंटिफिकेशनल अथारिटी ऑफ इंडिया (यूआईडीए) ने आधार के सत्यापन में केवल 55,570 पेंशनरों का आधार ही वैध माना है। बुधवार को सचिवालय में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) की समीक्षा बैठक के दौरान केंद्र सरकार के अपर सचिव ने प्रदेश सरकार को अवैध आधार की जानकारी दी।
प्रदेश के लाखों पेंशनर का भी हो सकता सत्यापन
money
राज्य सरकार द्वारा संचालित पेंशन योजनाओं से जुड़े लाखों पेंशनरों के खाते भी आधार से लिंक हो चुके हैं। मगर अभी इनका सत्यापन नहीं हुआ है। केंद्र सरकार के सत्यापन में हजारों पेंशनरों के आधार अवैध पाए जाने के बाद अब प्रदेश सरकार भी सत्यापन करवा सकती है। आधिकारिक सूत्रों ने इसके संकेत दिए हैं।
एक लाख पेंशनरों की जांच जारी
समाज कल्याण विभाग की पेंशन ले रहे उन करीब एक लाख पेंशनरों की जांच चल रही है, जिन्होंने अपने खाते आधार से लिंक नहीं किए। विभाग पता लगा रहा है कि आधार से लिंक न करने की वजह कहीं कोई फर्जीवाड़ा तो नहीं है।
अवैध आधार वाले पांच राज्य
राज्य-कुल पेंशनर-अवैध आधार
उत्तराखंड- 130382-74742
बिहार-7,00649-48,842
मध्यप्रदेश-16,66,976-32,183
ओडिसा-13,00006-23,775
पश्चिम बंगाल-13,83,890-22,991
छत्तीसगढ़-7,58,880-22,054
उत्तरप्रदेश-12,62,199-13967
हिमाचल प्रदेश-81733-3,150
अवैध आधार की संख्या बहुत अधिक है। इस बात का पता लगा जाएगा कि अवैध ठहराए गए आधार के पीछे के मुख्य कारण क्या हैं? फार्म भरने, उन्हें अपलोड करने या आधार में कोई त्रुटि होने की वजह से तो नहीं आधार को अवैध ठहराया गया। इनमें से कोई भी संभावना हो सकती है। अवैध ठहराए गए आधार संख्या वाले पेंशनरों की क्रास वेरिफिकेशन पूरा होने तक पेंशन रोकी जा सकती है।
- मनोज चंद्रन, अपर सचिव, समाज कल्याण