एमडीडीए के फ्लैट को तोड़कर मस्जिद और मदरसा बनाने के मामले में नया खुलासा हुआ है। पड़ताल में यह पता चला है कि ईडब्ल्यूएस भवन स्वामी लतीफुर्रहमान काॅलोनी में मस्जिद और मदरसा निर्माण के बाद इसे वक्फ बोर्ड को दान कर चुका है। हालांकि, अभी तक वक्फ बोर्ड ने भवन पर कब्जा नहीं लिया है।
जानकारी के मुताबिक करीब चार साल पूर्व भवन स्वामी ने इसे वक्फ बोर्ड को दान कर दिया था। अब एमडीडीए और जिला प्रशासन पूरी जानकारी व दस्तावेज जुटाने में लग गया है। वहीं, वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स कहते हैं, अभी तक इस पर कब्जे के प्रयास नहीं किए गए। दस्तावेजों को निकलवा कर जल्द कब्जा लिया जाएगा।
डालनवाला स्थित एमडीडीए की ईडब्ल्यूएस कॉलोनी में आवंटित ईडब्ल्यूएस आवासीय भवन 192-193 को तोड़कर मस्जिद और मदरसा बना दिया गया था। इसमें सामूहिक रूप से नमाज पढ़ी जा रही थी। 17 अप्रैल को इसी कालोनी के राजकिशोर बलोदी ने जनसुनवाई में जिलाधिकारी सोनिका से इसकी शिकायत की। डीएम ने एमडीडीए को निर्माण सील करने के आदेश पारित किए। कार्रवाई से एक दिन पहले ही भवन स्वामी ने शपथ पत्र देकर कहा कि वह स्वयं किए गए निर्माण को तोड़ देगा। प्रकरण तूल पकड़ा तो एमडीडीए ने इस निर्माण को सील कर दिया। अब नया तथ्य सामने आने के बाद प्रशासन और एमडीडीए पशोपेश में हैं। उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि जब आवासीय काॅलोनी में बने फ्लैट को मस्जिद और मदरसे के नाम पर वक्फ को दान दे दिया गया, तो अब इसमें आगे क्या कदम उठाएं।
एमडीडीए की ईडब्ल्यूएस कॉलोनी में आवंटित भवन संख्या 192-193 को लतीफुर्रहमान ने मदरसा और मस्जिद बनाकर करीब चार साल पूर्व वक्फ बोर्ड को दान कर दिया था। लेकिन अब तक वक्फ ने कब्जा लेने का प्रयास नहीं किया। इस बीच यह भी पता चला था कि तत्कालीन एसडीएम प्रत्यूष कुमार ने इस पर कोई आपत्ति भी लगाई थी। -शादाब शम्स, अध्यक्ष, वक्फ बोर्ड
एसडीएम रहते हुए मैंने आवासीय भवनों को मदरसा और मस्जिद में परिवर्तित करने पर आपत्ति लगाई थी। मैंने कहा था कि एमडीडीए की ओर से बनवाए गए फ्लैट की भू संरचना को कोई बदल नहीं सकता। यहां पर किसी प्रकार की सामूहिक धार्मिक प्रकिया नहीं की सा सकती है। वक्फ को दान करने ओर इस पर आपत्ति के बारे में मुझे जानकारी नहीं है। - प्रत्यूष सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट, देहरादून