उत्तराखंड बहुउद्देशीय वित्त एवं विकास निगम की ओर से संचालित योजनाओं का फायदा उठाकर तीन हजार से ज्यादा कर्जदारों ने सवा चार करोड़ की रकम दबा ली। तमाम कोशिशों के बावजूद पैसा लौटाने को तैयार नहीं हो रहे 13 जिलों के इन बकाएदारों के खिलाफ रिकवरी सर्टिफिकेट (आरसी)जारी किए गए हैं। डिफॉल्टरों के मामले में सबसे ऊपर नैनीताल जिले का नाम है।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अधीन उत्तराखंड बहुउद्देशीय वित्त एवं विकास निगम द्वारा गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले अनुसूचित जाति-जनजाति के अलावा पिछड़ा वर्ग, विकलांग और सफाई कर्मियों को स्वरोजगार अपनाने के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत लोन दिया जाता है। शहरी क्षेत्र में दुकान निर्माण, जीविका अवसर प्रोत्साहन व अन्य योजनाओं के तहत कृषि और गैर कृषि के लिए पात्र लाभार्थी को 20 हजार से सात लाख रुपये तक ऋण देने का प्रावधान है।
बीते वर्षों में इस योजना के तहत उत्तराखंड के विभिन्न जिलों के हजारों लाभार्थियों ने निगम से ऋण लिया। एक निर्धारित अवधि के बाद जब लोन की किश्तें अदा करने की बात आई तो तमाम कर्जदारों ने व्यवसाय न चलने की दुहाई देते हुए किश्त अदा कर पाने में असमर्थता जता दी। जब पड़ताल की गई तो पूरे राज्य में ऐसे तीन हजार बकाएदारों पर करीब सवा चार करोड़ की कर्ज अदायगी पाई गई।
निगम ने पैसे की रिकवरी के लिए तमाम जतन किए, मगर कोई फायदा नहीं हुआ। आखिरकार इन तीन हजार से अधिक डिफाल्टरों को रिकवरी सर्र्टिफिकेट जारी करके वसूली के प्रयास आरंभ किए गए हैं। निगम के महाप्रबंधक जीआर नौटियाल का कहना है कि संचालित योजनाओं के तहत पात्र लाभार्थियों को ऋण दिया जाता है। उन्होंने कहा कि योजनाओं का लाभ उठाकर ऋण की राशि न लौटाने वालों के विरुद्ध नियमानुसार आरसी जारी की गई हैं।