बरसात में आबादी में मगरमच्छों के पहुंचने के केस ज्यादा
ये मगरमच्छ रेलवे स्टेशन, आबादी क्षेत्र, तालाब, खेत से रेस्क्यू किए गए हैं। सबसे अधिक मगरमच्छ खटीमा से रेस्क्यू किए गए हैं। मगरमच्छों को रेस्क्यू करने के बाद डैम में छोड़ा गया। बताया, मगरमच्छ को जब छोड़ा जाता है, तो उस समय उनके उग्र होने की आशंका ज्यादा होती है। ऐसे संवेदनशील जगहों पर तैनात वनकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण देने का फैसला किया गया है।
इसके अलावा वॉच टॉवर भी स्थापित किए जाएंगे। सेवानिवृत्त डीएफओ बाबूलाल कहते हैं कि बरसात में आबादी में मगरमच्छों के पहुंचने के केस अधिक आते हैं। करीब 18 मगरमच्छों को बीते साल रेस्क्यू किया गया था, मगर इस बार संख्या अधिक है।
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ये इलाके हैं संवेदनशील
वन विभाग ने रनसाली रेंज में खकरा, काली किच नाला, देहवा, सरौजा बीट का दक्षिण-पश्चिमी भाग में बहने वाला नाला, बाराकोली में देहवा नदी, कटरा नाला, नानक सागर निहाई, किलपुरा रेंज में चटिया नाला, बुड़ाबाग नाला, डौली रेंज में कटना नाला, बडिंया नाला, किशनपुर रेंज में बैंकठपुर, गोविंदनगर, जेल कैंप, सिडकुल क्षेत्र और गौला रेंज।